नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की गतिविधियों और संबंधित तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा।
नए निर्देशों के मुताबिक, यदि चरित्र सत्यापन के दौरान किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता हिंसक गतिविधियों में पाई जाती है या वह ऐसे संगठन से जुड़ा पाया जाता है जिसका उद्देश्य हिंसक तरीके से व्यवस्था में बदलाव लाना है, तो उसकी सरकारी नियुक्ति प्रभावित हो सकती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों की पृष्ठभूमि की उचित जांच सुनिश्चित करना है। चरित्र सत्यापन के दौरान संबंधित तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
सरकार के निर्देशों में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया गया है। किसी अभ्यर्थी को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
इसका मतलब है कि विचारधारा और हिंसक गतिविधियों में वास्तविक संलिप्तता को अलग-अलग आधारों पर देखा जाएगा। किसी अभ्यर्थी के संबंध में निर्णय लेते समय केवल उसकी राजनीतिक मान्यताओं के बजाय सत्यापन में सामने आए प्रासंगिक तथ्यों को ध्यान में रखना होगा।
नए नियमों के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने या मामले की जांच लंबित रहने से उसे स्वतः सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा।
इस प्रावधान का महत्व इसलिए है क्योंकि किसी मामले में शिकायत या FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों की पुष्टि नहीं करता। ऐसे मामलों में चरित्र सत्यापन के दौरान उपलब्ध तथ्यों और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा। यानी केवल FIR दर्ज होने को ही नियुक्ति से वंचित करने का स्वतः आधार नहीं बनाया जाएगा।
सरकार ने चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए पुलिस को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, पुलिस को अभ्यर्थी के चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी।
इस समयसीमा का उद्देश्य सत्यापन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को कम करना और सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। समय पर रिपोर्ट मिलने से नियुक्ति संबंधी आगे की कार्रवाई में भी मदद मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए इन निर्देशों का सीधा संबंध नियुक्ति से पहले होने वाली पृष्ठभूमि जांच से है। अभ्यर्थियों को अपने आवेदन में सही जानकारी देनी चाहिए और सत्यापन के दौरान मांगे गए विवरण उपलब्ध कराने चाहिए।
वहीं, किसी मामले में FIR दर्ज होने या जांच लंबित होने की स्थिति में अभ्यर्थी को केवल इसी आधार पर स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। इसी तरह, राजनीतिक विचारधारा मात्र को भी अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जाएगा। दूसरी ओर, हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता या हिंसक तरीके से व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़ाव सामने आने पर नियुक्ति की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार के इन निर्देशों में चरित्र सत्यापन के दौरान प्रासंगिक तथ्यों की जांच और रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। एक तरफ हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखने की व्यवस्था है, तो दूसरी तरफ केवल FIR या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर स्वतः अयोग्यता से बचने का स्पष्टीकरण भी दिया गया है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर जारी नए निर्देशों के तहत पुलिस को 30 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी। हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता नियुक्ति के लिए अयोग्यता का आधार बन सकती है, जबकि केवल राजनीतिक विचारधारा, FIR दर्ज होने या जांच लंबित रहने से अभ्यर्थी स्वतः अयोग्य नहीं होगा।
