उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई के प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जरी विभाग द्वारा क्रेनियोसिनोस्टोसिस: सिद्धांत, नैदानिक मूल्यांकन एवं उपचार विषय पर राष्ट्रीय स्तर की सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों और चिकित्सा विद्यार्थियों को इस जटिल जन्मजात विकार के आधुनिक निदान एवं उपचार पद्धतियों से अवगत कराना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन यूपीयूएमएस के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सतत चिकित्सा शिक्षा चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्टता की आधारशिला है। चिकित्सा विज्ञान में निरंतर हो रहे नवाचारों और तकनीकी प्रगति के अनुरूप चिकित्सकों का अद्यतन रहना आवश्यक है, ताकि मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
कुलपति ने विभाग की इस शैक्षणिक पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन अनुसंधान, नवाचार और बहुविषयक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यूपीयूएमएस की निरंतर प्रगति पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में प्रो-वाईस चांसलर प्रो. (डॉ.) रामाकांत यादव, डीन प्रो. (डॉ.) आदेश कुमार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस.पी. सिंहचिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
सीएमई के दौरान एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव अग्रवाल ने क्रेनियोसिनोस्टोसिस की आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, निदान प्रक्रिया और उपचार संबंधी नवीनतम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने इस जटिल विकार के सफल प्रबंधन में बहु-विषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
वहीं प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल सक्सेना ने यूपीयूएमएस सैफई में उपलब्ध उन्नत प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जरी सेवाओं, विभाग की उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभाग मरीजों को अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को भी निरंतर बढ़ावा दे रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस सीएमई कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से समृद्ध किया और प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में विशेषज्ञों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच प्रदान किया।
