ऊसराहार। ताखा क्षेत्र के पुरैला गांव में आयोजित रामकथा के अंतिम दिवस “राम विलाप” प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के बीच अटूट प्रेम का मार्मिक वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित भक्तों की आंखें नम हो गईं।
व्यास पीठ से कथा का रसपान कराते हुए अमित कुमार महाराज ने कहा कि आज के समय में जहां संपत्ति और स्वार्थ के कारण भाई-भाई में विवाद देखने को मिलते हैं, वहीं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का प्रेम समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि भगवान राम का विलाप यह संदेश देता है कि संसार में हर वस्तु दोबारा मिल सकती है, लेकिन सच्चा भाई दोबारा नहीं मिलता।
कथा के दौरान उन्होंने वह प्रसंग सुनाया जब युद्धभूमि में लक्ष्मण मूर्छित होकर गिर पड़े थे और भगवान राम व्याकुल होकर विलाप करते हुए कहते हैं—
“निज जननी के एक कुमारा, तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।”
अर्थात हे तात! तुम अपनी माता के इकलौते पुत्र और उनके प्राणों के आधार हो, मैं अयोध्या लौटकर उन्हें क्या उत्तर दूंगा। इस भावपूर्ण प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कथा में लक्ष्मण मूर्छा, हनुमान जी द्वारा द्रोणागिरी पर्वत लाने, राम-रावण युद्ध तथा भगवान राम की विजय से लेकर राम राज्याभिषेक तक का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा का समापन आरती एवं महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ।
इस अवसर पर लालजी राठौर, सतीश दुबे, राधामोहन, राजू, अभिषेक, घनश्याम, कमल ठाकुर, दलवीर सिंह, हरिओम दुबे, कुंवर सिंह, ब्रजेश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
