जनपद के बकेवर स्थित 50 शैय्या अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला मरीज की जांच रिपोर्ट में हुई भारी गड़बड़ी के कारण उसे गंभीर किडनी रोगी घोषित कर दिया गया, जबकि बाद में सच्चाई कुछ और ही निकली।

मिली जानकारी के अनुसार, 52 वर्षीय महिला मरीज की अस्पताल में KFT (किडनी फंक्शन टेस्ट) और LFT (लिवर फंक्शन टेस्ट) जांच कराई गई थी। अस्पताल की लैब द्वारा जारी रिपोर्ट में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर अत्यधिक बढ़ा हुआ दिखाया गया, जिसके आधार पर डॉक्टरों ने मरीज को गंभीर किडनी रोगी मानते हुए डायलिसिस तक की सलाह दे दी।
रिपोर्ट से घबराए परिजन तुरंत मरीज को उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई लेकर पहुंचे, जहां दोबारा जांच कराई गई। यहां की रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया—मरीज की किडनी लगभग सामान्य पाई गई और बकेवर अस्पताल की पहले दी गई रिपोर्ट को गलत करार दिया गया।
इस खुलासे के बाद बकेवर अस्पताल की लैब की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई, जिससे एक सामान्य मरीज को गंभीर बीमारी का शिकार बता दिया गया। यदि समय रहते सही जांच न होती, तो मरीज को अनावश्यक और जोखिम भरा इलाज झेलना पड़ सकता था।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में जांच प्रक्रिया में लापरवाही बरती जा रही है और बिना मानक परीक्षण के ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अब क्षेत्र में मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज की जान के साथ इस तरह का खिलवाड़ न हो।
