जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित पांडुलिपियों से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों एवं ग्रंथों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् मिशन भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है। इस मिशन के तहत देशभर में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों और दुर्लभ दस्तावेजों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जाएगा, ताकि यह अमूल्य धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके।
बैठक में बताया गया कि जनपद इटावा ज्ञान, दर्शन, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध भूमि रहा है। यह मिशन विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के साथ-साथ डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण और विरासत संरक्षण के राष्ट्रीय संकल्प को भी साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जिला पर्यटन अधिकारी मोहित सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मिशन के अंतर्गत विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण और डिजिटलीकरण किया जाएगा।
उन्होंने अपील की कि जिन संस्थाओं या व्यक्तियों के पास ऐसी पांडुलिपियां या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, वे जिला पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, विकास भवन से संपर्क कर सकते हैं, ताकि इन पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर ज्ञान भारतम् पोर्टल के माध्यम से आम जनता के लिए उपलब्ध कराया जा सके।

बैठक में जिला पर्यटन अधिकारी मोहित सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी सीमा त्रिपाठी, एआरटीओ प्रदीप देशमणि, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्रा, एडीपीआरओ रोहित सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
