नई दिल्ली। डिजिटल युग में जनसंचार के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है, जहां डिजिटल रेडियो और डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) तकनीकें नई क्रांति का आधार बन रही हैं। सरकार के अनुसार, ये तकनीकें एक ही फ्रीक्वेंसी पर कई चैनलों का प्रसारण संभव बनाकर स्पेक्ट्रम का बेहतर उपयोग करती हैं, जिससे किफायती और प्रभावी संचार व्यवस्था विकसित हो रही है।
डिजिटल रेडियो जहां फ्री-टू-एयर और किफायती प्रसारण इकोसिस्टम उपलब्ध कराता है, वहीं D2M तकनीक क्षेत्रीय प्रसारण अवसंरचना के माध्यम से वीडियो, ऑडियो और डेटा सीधे मोबाइल फोन तक पहुंचाती है। खास बात यह है कि इसके लिए न तो सिम कार्ड की आवश्यकता होती है और न ही मोबाइल डेटा की। इससे मनोरंजन, शिक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी आपातकालीन सूचनाएं लोगों तक तेजी से पहुंचाई जा सकती हैं।
स्पैम कॉल्स और अनचाहे वाणिज्यिक संचार (UCC) पर नियंत्रण के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने सख्त व्यवस्था लागू की है। ट्राई अपने दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम (TCCCPR) के तहत इन कॉल्स को नियंत्रित करता है। इसके लिए एक उन्नत वितरित लेजर प्रौद्योगिकी (DLT) प्लेटफॉर्म (ब्लॉकचेन आधारित) विकसित किया गया है।
इस DLT प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता अपनी पसंद दर्ज कर सकते हैं कि वे किस प्रकार के प्रमोशनल संदेश प्राप्त करना चाहते हैं। साथ ही, बैंक, बीमा कंपनियां और एयरलाइंस जैसी प्रमुख संस्थाएं और टेलीमार्केटर भी इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं। प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे पंजीकृत और गैर-पंजीकृत टेलीमार्केटरों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो पाती है।
सरकार ने प्रसारण क्षेत्र के विकास के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के माध्यम से कई नीतिगत कदम उठाए हैं। ‘प्रसारण अवसंरचना और नेटवर्क विकास (BIND)’ योजना के तहत दूरदर्शन और आकाशवाणी के नेटवर्क का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस योजना के जरिए प्रसार भारती लगातार नई तकनीकों को अपनाकर प्रसारण सेवाओं को उन्नत बना रहा है।
यह जानकारी डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में सांसद राव राजेंद्र सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सरकार का मानना है कि इन तकनीकी पहलों से देश में डिजिटल संचार को नई दिशा मिलेगी और नागरिकों को बेहतर, सुलभ और सुरक्षित सेवाएं उपलब्ध होंगी।
