इटावा 25 मार्च, 2026- जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में की गई।
बैठक में जिलाधिकारी महोदय ने बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट (सी0डी0) रेशियो की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान बताया गया कि सरकारी बैंकों का सी0डी0 रेशियो 44.70, निजी बैंकों का 95.56 तथा कुल वाणिज्यिक बैंकों का सी0डी0 रेशियो 52.32 प्रतिशत है, कुल सी0डी0 रेशियों 52.04 है। इस पर जिलाधिकारी महोदय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जिन बैंकों का सी0डी रेशि
यो कम है, उनमें तत्काल सुधार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब जनपद से जमा के रूप में धन लिया जा रहा है, तो उसी अनुपात में ऋण वितरण भी जनपद में किया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि धन का स्वभाव गतिशील होता है, इसे रुकना नहीं चाहिए, इसलिए अधिक से अधिक ऋण वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बैंकों को निर्देशित किया कि विशेष कैंप आयोजित कर सी0डी0 रेशियो में वृद्धि की जाए तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही छोटी-छोटी योजनाओं में भी यदि प्रत्येक बैंक नियमित रूप से आवेदन स्वीकृत करेगा, तो लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में सरकार का महत्वपूर्ण सहयोग है, अतः बैंकों को भी जनहित में ऋण वितरण बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक सिटी अभयनाथ त्रिपाठी ने बैंक सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी बैंक शाखाओं एवं ए0टी0एम0 में फिजिकल सिक्योरिटी के तहत अंदर एवं बाहर सीसीटीवी कैमरे डीवीआर सहित लगाए जाएं, जिनका कम से कम 6 माह का बैकअप उपलब्ध हो। साथ ही अलार्म सिस्टम पूर्णतः क्रियाशील रहे तथा बड़े एटीएम पर सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। तैनात शस्त्रधारी गार्डों का सत्यापन भी अनिवार्य रूप से कराया जाए।
साइबर सुरक्षा के संबंध में उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैंक अपने यहां साइबर नोडल अधिकारी नामित करता है उनका संपर्क विवरण प्रशासन को उपलब्ध कराए। किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर पर सूचना देना सुनिश्चित करें, क्योंकि “गोल्डन ऑवर्स” में सूचना देने से धन की रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।
उन्होंने बताया कि जनपद इटावा में पिछले एक वर्ष में लगभग 7 करोड़ रुपये का साइबर फ्रॉड हुआ है, जिसमें से लगभग 2.5 करोड़ रुपये की धनराशि वापस कराई गई, जो कि लगभग 34 प्रतिशत रिकवरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध एक प्रकार की “डिजिटल डकैती” बन चुका है। मुख्यमंत्री द्वारा साइबर फ्रॉड में 60 प्रतिशत रिकवरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे प्राप्त करने के लिए बैंक एवं पुलिस के बीच बेहतर समन्वय और जागरूकता आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक बैंक शाखा में 1930 हेल्पलाइन नंबर का बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए तथा ग्राहकों को जागरूक किया जाए। साथ ही जनपद के साइबर विशेषज्ञों एवं बैंक के साइबर क्राइम नोडल अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित कर समन्वय को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क एवं जनपद स्तर पर साइबर थाना संचालित है, जहां शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी महोदय ने IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाए। उन्होंने कहा कि IGRS शिकायतों के निस्तारण के लिए 2 सप्ताह की समयसीमा निर्धारित है, इसके बाद प्रकरण डिफॉल्ट श्रेणी में चला जाता है, जिससे जनपद की रैंकिंग प्रभावित होती है। अतः सभी बैंक समयबद्ध एवं संतोषजनक आख्या उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें तथा आख्या बैंक अपने लेटरहेड पर ही प्रस्तुत करें।
जिलाधिकारी महोदय ने यह भी निर्देश दिए कि विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित लंबित प्रकरणों को शीघ्रता से निस्तारित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
उक्त बैठक में एस0पी0 सिटी अभयनाथ त्रिपाठी, एल0डी0एम0 सहित विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि आदि उपस्थित रहे।
