डिजिटल शिक्षा ज़रूरी है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा पहले : प्रेम कुमार शाक्य

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 डिजिटल शिक्षा, मोबाइल, इंटरनेट और एआई के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर पहल सामने आई है। समाजसेवी एवं बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रेम कुमार शाक्य ने बच्चों के लिए आयु एवं शैक्षणिक स्तर के अनुसार सुरक्षित शैक्षणिक डिवाइस विकसित किए जाने की मांग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनाए जाने की अपील की है।
                प्रेषित किए गए पत्र में प्रेम कुमार शाक्य ने उल्लेख किया है कि वर्तमान डिजिटल युग में शिक्षा तेजी से मोबाइल, इंटरनेट और एआई आधारित तकनीकों पर निर्भर होती जा रही है। इससे बच्चों को अध्ययन में नई सुविधाएं अवश्य मिल रही हैं, लेकिन चिंता का विषय यह है कि प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक के छात्र एक ही प्रकार के मोबाइल डिवाइस का उपयोग करने को मजबूर हैं। ऐसे डिवाइसों में हर उम्र और हर स्तर की सामग्री उपलब्ध होने के कारण बच्चे अनजाने में आपत्तिजनक, भ्रामक एवं अशोभनीय कंटेंट तक पहुंच जाते हैं, जिसका सीधा प्रभाव उनके मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास पर पड़ रहा है।
                समाजसेवी  शाक्य ने सरकार से आग्रह किया है कि शिक्षा विभाग एवं तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से प्राइमरी, जूनियर, माध्यमिक एवं डिग्री स्तर के छात्रों के लिए अलग-अलग अथवा आयु-आधारित सुरक्षित डिजिटल/एआई शैक्षणिक डिवाइस विकसित किए जाएं। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन डिवाइसों में केवल पाठ्यक्रम एवं शैक्षणिक स्तर के अनुरूप सामग्री, सुरक्षित एआई आधारित शैक्षणिक टूल्स और अध्ययन सामग्री ही उपलब्ध हो, जबकि सोशल मीडिया, अनावश्यक एप्स और आपत्तिजनक कंटेंट पर पूर्ण प्रतिबंध रहे। साथ ही अभिभावक एवं शिक्षक निगरानी प्रणाली भी अनिवार्य की जाए।
               प्रेम कुमार शाक्य ने कहा कि आज के समय में बच्चों को डिजिटल और एआई आधारित शिक्षा से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें असुरक्षित डिजिटल वातावरण में छोड़ देना भी उचित नहीं है। मोबाइल और एआई टूल्स का अनियंत्रित उपयोग बच्चों की एकाग्रता, व्यवहार, संस्कार और मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
                उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे बच्चों के सिलेबस अलग-अलग होते हैं, वैसे ही उनके लिए डिवाइस और डिजिटल सुविधाएं भी अलग होनी चाहिए। यदि सरकार इस दिशा में ठोस पहल करती है तो यह बच्चों की डिजिटल सुरक्षा, शिक्षा की गुणवत्ता और देश के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा।
             समाजसेवी  शाक्य ने आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री पर पूर्ण रोक, एआई के सुरक्षित एवं नियंत्रित उपयोग तथा बच्चों के लिए सुरक्षित, शैक्षणिक और निगरानीयुक्त डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराने की पुरज़ोर मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा ज़रूरी है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा पहले।
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