जिले के गांवों में स्वच्छता बनाए रखने और कूड़े के निस्तारण के लिए पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत कूड़ा निस्तारण केंद्र (रिसोर्स रिकवरी सेंटर- आरसीसी) बनाए जाने की योजना है, लेकिन स्थिति यह है कि अभी तक तय लक्ष्य की आधी संख्या में भी केंद्रों का निर्माण नहीं हो सका है। जिले में कुल 676 आरसीसी केंद्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से पिछले चार वर्षों में 476 केंद्रों का निर्माण होना था। हालांकि, अब तक सिर्फ 190 केंद्र ही बनाए जा सके हैं, जबकि 146 केंद्रों का निर्माण शुरू भी नहीं हुआ है।
जिले में आठ ब्लॉकों के तहत 469 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें राजस्व ग्रामों की संख्या 680 है। शासन ने प्रत्येक गांव को स्वच्छ बनाने के लिए पंचायती राज विभाग को आरसीसी केंद्र बनाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए विभाग को अब तक ठोस एवं अवशिष्ट प्रबंधन योजना के तहत 47.41 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। इस योजना में गांवों में सफाई के लिए खाद के गड्ढे, कूड़ा उठाने के लिए ट्राइसाइकिल और ई-रिक्शा की खरीद, सोखपिट, लीचपिट और फिल्टर चैंबर के निर्माण के साथ-साथ कूड़े को एकत्रित कर निस्तारण के लिए आरआरसी और मिनी आरआरसी केंद्र स्थापित करने की व्यवस्था शामिल है। खास तौर पर 5,000 से अधिक आबादी वाले गांवों में यह सुविधा प्राथमिकता पर लागू की जानी थी।
लक्ष्य से पीछे रहने के कारण अब विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिन ग्राम पंचायतों ने अभी तक केंद्रों का निर्माण नहीं कराया, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कूड़ा निस्तारण केंद्रों के निर्माण में तेजी लाई जाएगी ताकि गांवों में स्वच्छता बनी रहे और कूड़े का समुचित निस्तारण हो सके। विभाग ने शेष केंद्रों के निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार की है और जल्द ही इसे पूरा करने का दावा किया है।
