इटावा। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार अधिक से अधिक दिव्यांग बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम के निर्देशन में जनपद मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय मोतीझील, इटावा में मेडिकल असेसमेंट कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों का परीक्षण किया गया और उन्हें दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किए गए।

दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के बाद प्रत्येक बच्चे का यूडीआईडी (Unique Disability ID) कार्ड के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसी क्रम में 6 मार्च 2025 को बीएसए सभागार कक्ष में दिव्यांग बच्चों के प्रमाण-पत्र को ऑनलाइन करने हेतु एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रीमती अर्चना सिन्हा की अध्यक्षता में समेकित शिक्षा की जिला समन्वयक द्वारा आयोजित की गई।

कार्यक्रम में विशेष रूप से रिसोर्स पर्सन सुनील कुमार, लेखाकार अंकित कुमार (सीएमओ कार्यालय, इटावा) द्वारा दिव्यांग बच्चों के यूडीआईडी कार्ड के ऑनलाइन पंजीकरण की तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण सत्र के दौरान, एक दिव्यांग बच्चे के स्वावलंबन पोर्टल पर यूडीआईडी कार्ड के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर उसका लाइव प्रदर्शन भी किया गया।

तकनीकी प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि यदि किसी बच्चे की ऑनलाइन एंट्री में त्रुटि हो जाती है तो उसे किस प्रकार सही किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए प्रत्येक विकास खंड स्तर पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों और विशेष शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी दी गई।

इस अवसर पर जिले के विभिन्न विकास खंडों में कुल 1333 बच्चों के यूडीआईडी कार्ड के ऑनलाइन पंजीकरण की योजना बनाई गई, जिसमें ताखा के 122, महेवा के 252, चकरनगर के 92, बसरेहर के 141, बढ़पुरा के 171, भरथना के 127, जसवंतनगर के 210, सैफई के 114 और इटावा नगर के 104 बच्चों के नाम शामिल किए गए।

कार्यशाला में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. बलराज के निर्देशन में बताया गया कि प्रत्येक बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) पर कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा विशेष शिक्षकों के सहयोग से सभी दिव्यांग बच्चों का यूडीआईडी पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। यह आयोजन दिव्यांग बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उनकी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया। इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान कर प्रशासन ने दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
