बिजली कर्मियों का निजीकरण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

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इमरान बेग – विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बिजली के निजीकरण में भारी भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करें। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज हजारों बिजली कर्मचारियों ने शक्ति भवन, मुख्यालय का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के चलते निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कन्सल्टेंट नियुक्त करने की टेक्निकल बिड नहीं खोली जा सकी।

विरोध प्रदर्शन में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों राजीव सिंह, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, पी.के.दीक्षित, सुहैल आबिद, राजेंद्र घिल्डियाल, चंद्र भूषण उपाध्याय, आर वाई शुक्ला, छोटेलाल दीक्षित, देवेन्द्र पाण्डेय, आर बी सिंह, राम कृपाल यादव, मो वसीम, मायाशंकर तिवारी, राम चरण सिंह, मो इलियास, श्रीचन्द, सरजू त्रिवेदी, योगेन्द्र कुमार, ए.के. श्रीवास्तव, के.एस. रावत, रफीक अहमद, पी एस बाजपेई, जी.पी. सिंह, राम सहारे वर्मा, प्रेम नाथ राय, विशम्भर सिंह एवं राम निवास त्यागी ने संबोधित किया।

इस प्रदर्शन में राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष इं. अजय कुमार, पूर्व अध्यक्ष इं. जी वी पटेल और बड़ी संख्या में जूनियर इंजीनियर सम्मिलित हुए। विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा और पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।संघर्ष समिति ने बताया कि टेक्निकल बिड खोलने की अगली तारीख 10 मार्च निर्धारित की गई है। राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर भी जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए।

संयुक्त समिति इटावा के बैनर तले संयोजक विवेक कुमार सिंह, उपखंड अधिकारी गगन अग्निहोत्री, पीयूष मौर्य, राहुल कुमार, अवर अभियन्ता संघ अध्यक्ष वीरेंद्र, TG2 संघ के अध्यक्ष मदन यादव व अन्य साथियों ने भारी संख्या में अधीक्षण अभियंता कार्यालय में उपस्थित होकर निजीकरण के विरुद्ध विरोध जताया। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह निरस्त नहीं की जाती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। आज इस आंदोलन का 96वाँ दिन था।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि ट्रांजेक्शन कंसलटेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया में ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ का प्रावधान आर.एफ.पी डॉक्यूमेंट में पहले मौजूद था, लेकिन जनवरी में इसे अचानक हटा दिया गया। इससे भ्रष्टाचार की आशंका बलवती हो जाती है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 42 जनपदों की परिसंपत्तियों का अब तक कोई मूल्यांकन नहीं किया गया है, न ही इनके राजस्व की संभावनाओं का आकलन हुआ है।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिना परिसंपत्तियों का मूल्यांकन और राजस्व क्षमता का आकलन किए बिना निजीकरण की प्रक्रिया जारी रखना ‘इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003’ की धारा 131 का खुला उल्लंघन है। ट्रांजेक्शन कंसलटेंट नियुक्त करने में ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ का प्रावधान हटाना सीवीसी की गाइडलाइन्स का भी उल्लंघन है।संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विश्वास व्यक्त करते हुए उनसे अपील की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर निजीकरण की प्रक्रिया को निरस्त करने की कृपा करें।आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।

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