प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन बिल 2025 के खिलाफ इटावा के अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। डीबीए अध्यक्ष अनिल कुमार गौर, महामंत्री देवेंद्र पाल, सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष अनिल कुमार तिवारी, महामंत्री अरुण कुमार गुप्ता सहित अन्य अधिवक्ताओं ने सैकड़ों की संख्या में एकत्र होकर प्रधानमंत्री भारत सरकार को विरोध ज्ञापन सौंपा। इससे पहले अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए बिल को अधिवक्ता विरोधी बताया।
डीबीए के मीडिया प्रभारी मनोज कुमार दीक्षित और रूपेन्द्र सिंह चौहान ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 में संशोधन कर नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है। इस बिल में धारा 4, धारा 9, धारा 24ए, धारा 35ए, धारा 36, धारा 49ए और धारा 49ए(1) जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो सीधे तौर पर अधिवक्ताओं के अधिकारों और स्वतंत्रता को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन अधिवक्ताओं के संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 19) और जीवन तथा स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) का हनन करता है। साथ ही, यह बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और समस्त बार एसोसिएशनों की स्वतंत्रता, एकता और अखंडता को कमजोर करने का प्रयास है। अधिवक्ता संशोधन 2025 के विरोध में इटावा कचहरी के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य ठप रखा। साथ ही, बिल की प्रति का पुतला जलाकर अपना आक्रोश जताया। इससे पहले, अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
इस विरोध प्रदर्शन के कारण वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा, और वे नई तारीख लेकर वापस लौट गए। विरोध प्रदर्शन के दौरान कचहरी परिसर में सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे। अधिवक्ताओं ने साफ किया कि यदि सरकार इस संशोधन को वापस नहीं लेती है, तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा।
