जिला अस्पताल के बाहर बिना टेंडर के शुरू हुआ वाहन स्टैंड अब मरीजों के लिए एक बड़ी परेशानी का कारण बन चुका है। स्टैंड पर वसूली करने वाले लोग अब बाइक, साइकिल, कार के साथ-साथ ई-रिक्शा और ऑटो को भी रोकने लगे हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल के बाहर गंभीर मरीजों के लिए स्टेचर और व्हीलचेयर जैसी कोई सुविधा नहीं दी जा रही है, जिसके कारण कई मरीजों को अपने परिजनों और लाठी के सहारे इमरजेंसी और ओपीडी तक जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस दौरान, मरीजों और उनके परिजनों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।

इसी बीच, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस वसूली व्यवस्था की निगरानी के लिए नगर पालिका के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को तैनात किया गया है। सोमवार को स्टैंड पर आउटसोर्सिंग कर्मचारी दयाकिशन, सजीव यादव, रणवीर अभय, समीर और विवेक पांडे मौजूद थे, जो इस व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे।

नगर पालिका के ईओ विजय मणि त्रिपाठी ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष के दो महीने बाकी हैं और फिलहाल टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी। अस्पताल के गेट पर पालिका कर्मियों की मौजूदगी से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर इमरजेंसी में बाइक लेकर अस्पताल आने वाले लोग परेशान हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पहले से भर्ती मरीजों को देखने पहुंचे लोग भी परेशान हो रहे हैं।
सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक कई बार यह स्थिति देखने को मिली, जब कोई इमरजेंसी में अपनी बाइक को अंदर ले जाने की कोशिश करता, तो पालिका कर्मी उसे रोक देते थे। इसके अलावा, अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखने पहुंचे उनके परिजनों से भी उनकी बाइक बाहर खड़ी करने और पर्ची कटवाने को कहा गया, जिससे कई बार पालिका कर्मियों से झड़प भी हो गई।
