इटावा देश के विकास की बात तब तक खोखली है, जब तक किसानों का विकास नहीं किया जाता। यह बात मानव कल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगरामाचार्य ने कचहरी परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही, जहां उन्होंने किसानों की समस्याओं पर चर्चा की। जगरामाचार्य ने कहा कि आज भी किसान कर्जदार है और कई किसानों की स्थिति इतनी खराब है कि वे आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। बीज, रासायनिक खादों के दाम बढ़ने के बावजूद समय पर ये सामग्री किसानों को नहीं मिल पाती, जिससे उचित पैदावार नहीं हो पाती।
उन्होंने आगे कहा कि सेठ साहूकारों से कर्ज लेने के साथ ही बैंक से ऋण भी महंगी ब्याज दरों पर मिलता है और बैंक कर्मचारी अपनी कमीशन खोरी के कारण किसानों को ऋण देने में देरी करते हैं। इससे किसान आर्थिक संकट में घिरा रहता है। इसके अलावा, किसानों के बच्चों को महंगी शिक्षा के कारण शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है। इस पूरी स्थिति को बदलने के लिए सरकार को किसानों के भले के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
जगरामाचार्य ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रोन्नति सिर्फ किसानों से संवाद स्थापित कर टीवी शो चलाने से नहीं हो सकती। वास्तविक बदलाव तब आएगा जब किसानों की समस्याओं को समझा जाएगा और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कार्य किए जाएंगे। कार्यक्रम में भाग लेने वाले अन्य वक्ताओं ने भी किसानों के मुद्दों पर प्रकाश डाला और इस दिशा में सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की।
कार्यक्रम के बाद, सभी उपस्थित लोग एकजुट हुए और किसानों की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में किसानों के ऋण माफी, सस्ते बीज और खाद की आपूर्ति, और सस्ती शिक्षा के लिए उपाय करने की मांग की गई है।
कार्यक्रम में इन्द्रपाल यादव, जगदीश नारायण, मिथलेश यादव, आलोक यादव, शिव शंकर यादव, रामविजय, रनबीर यादव और पुष्पेंद्र समेत कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता और किसान भी मौजूद रहे। उन्होंने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई और सभी ने मिलकर किसानों के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।
