इटावा। जिले में कोरोना काल के दौरान भेजे गए 18 वेंटिलेटर अब खराब हो रहे हैं और धूल फांक रहे हैं। ये वेंटिलेटर एक कमरे में बंद पड़े हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। विभाग का दावा है कि इन वेंटिलेटरों की सप्ताह में एक बार टेस्टिंग की जाती है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही नजर आ रही है। गुरुवार को जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की जांच की गई, और इस दौरान कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।
हर साल 27 दिसंबर को ‘विश्व महामारी दिवस’ मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य महामारी की रोकथाम और तैयारी के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। कोरोना जैसी घातक महामारी ने न सिर्फ देश बल्कि पूरे विश्व को अपनी चपेट में लिया। इस महामारी से सबक लेते हुए सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में कई सुधार किए थे, लेकिन अब जब महामारी का प्रकोप घट चुका है, तो स्वास्थ्य विभाग अपनी तैयारियों को लेकर लापरवाह नजर आ रहा है।
जिला अस्पताल की एमसीएच विग में बच्चों के इलाज के लिए विशेष पीकू वार्ड बनाया गया था, लेकिन वहां भी स्थिति ठीक नहीं है। कोरोना के दौरान मरीजों की सुरक्षा के लिए भेजे गए कई उपकरण और वेंटिलेटर अब धूल फांकते हुए पाए गए। एलटू अस्पताल के कमरे भी पूरी तरह से गंदगी और धूल से भरे हुए थे।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अगर भविष्य में फिर से कोरोना जैसी कोई नई महामारी आती है, तो विभाग पूरी तरह से तैयार है। हालांकि, जब महामारी के खतरे के बावजूद भेजे गए उपकरण इस स्थिति में हैं, तो सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग वाकई में अगली महामारी के लिए तैयार है?
यह स्थिति विभाग के दावों पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के नाम पर किए गए प्रयासों की वास्तविकता पर सवाल खड़े करती है।
