
इसके बाद वन में ताड़का के आतंक का दृश्य प्रस्तुत किया गया। मंच पर ताड़का के प्रवेश करते ही उसका विकराल रूप आकर्षण का केंद्र बन गया। उसके भयानक वेश और प्रभावशाली अभिनय ने वातावरण को रोमांचक बना दिया। ताड़का के रूप को देखकर रामलीला देखने पहुंचे छोटे बच्चे सहम गए। कलाकारों ने ताड़का के आतंक और वन में ऋषि-मुनियों के सामने उत्पन्न संकट को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
लीला के अगले प्रसंग में भगवान श्रीराम ने ताड़का का वध कर ऋषि-मुनियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। इस दृश्य के मंचन के दौरान दर्शकों ने भगवान श्रीराम के पराक्रम और धर्म की रक्षा के संदेश को देखा। ताड़का वध के साथ ही रामलीला के इस प्रसंग का समापन हुआ।
रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ कुदरैल के ग्राम प्रधान जिलेदार कश्यप ने किया। इस अवसर पर श्री रामलीला महोत्सव समिति की ओर से अतिथि को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अरविंद गुप्ता के साथ उमेश चंद गुप्ता, ज्ञानेंद्र अवस्थी, संजीव कश्यप, राहुल राज, लाखन सिंह, अनिल कौशल, अरुण गुप्ता, संदीप शर्मा, शिवकुमार यादव, जितेंद्र पाल और रामू गुप्ता सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
रामलीला के मंचन को देखने के लिए क्षेत्र के लोगों में उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म की रक्षा और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया।
