इटावा। विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अभियान के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अभियान को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक तथा दस्तक अभियान 12 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय संचारी रोगों की रोकथाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी विभाग निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार फील्ड में सक्रिय भूमिका निभाएं। बैठक में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों, माइक्रो प्लान, जनजागरूकता, साफ-सफाई, वेक्टर नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
डीएम ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को जलजनित एवं वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, त्वरित उपचार, सर्विलांस, रिपोर्टिंग और डेटा विश्लेषण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। वहीं नगर विकास एवं पंचायती राज विभाग को फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव, जलभराव की निकासी, नालियों की सफाई, झाड़ियों की कटाई और कचरा निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा। उन्होंने उथले हैंडपंपों को लाल रंग से चिन्हित कर उनके उपयोग पर रोक लगाने तथा शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए ग्राम प्रधानों और ग्राम स्तरीय समितियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए। शिक्षा विभाग को विद्यार्थियों और अभिभावकों को उबला पानी पीने, हाथ धोने, क्लोरीनेशन और संचारी रोगों से बचाव के अन्य उपायों की जानकारी देने तथा बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करने को कहा गया। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले दस्तक अभियान के तहत आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां संयुक्त रूप से घर-घर जाकर बुखार, इन्फ्लुएंजा, टीबी, कुपोषण, कुष्ठ, फाइलेरिया एवं कालाजार के संभावित मरीजों की पहचान करेंगी। इनका विवरण ई-कवच पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा तथा लाभार्थियों की आभा आईडी भी बनाई जाएगी। जिन घरों में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे या टीबी के मरीज होंगे, वहां विशेष स्टीकर लगाए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत 3 से 9 अक्टूबर तक सभी विकासखंडों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिन्हें संचारी रोग नियंत्रण अभियान से जोड़ते हुए स्वास्थ्य परीक्षण, दवाओं और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने डेंगू सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने तथा टीबी मरीजों की पहचान और जांच प्रक्रिया की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
डीएम ने डीपीआरओ को ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या समाप्त करने तथा ग्राम स्तर पर स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी एमओआईसी को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने को कहा। उन्होंने अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में अस्पताल का कचरा खुले में न फेंका जाए और निर्धारित व्यवस्था के तहत ही उसका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बच्चों के टीकाकरण का विवरण यू-विन पोर्टल पर समय से दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने बताया कि 24 से 30 सितंबर के बीच श्रम विभाग की ओर से तीन दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.के. सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. परितोष शुक्ला, डॉ. अनिल कुमार, सभी खंड विकास अधिकारी, एमओआईसी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
