उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस) सैफई में भर्ती एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की मृत्यु के बाद सामने आई घटना ने मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एटा जिले के मारहरा क्षेत्र निवासी राजकुमार सक्सेना का उपचार के दौरान निधन हो गया, लेकिन अंतिम समय में उनके परिजन अंतिम दर्शन तक के लिए नहीं पहुंचे। अंततः रक्तदाता समूह और पुलिस की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
जानकारी के अनुसार, राजकुमार सक्सेना कभी एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसायी थे और उनके पास करोड़ों रुपये की संपत्ति थी। बताया जाता है कि करीब दो दशक पहले संपत्ति और पारिवारिक विवादों के चलते उनके और परिवार के बीच संबंध बिगड़ गए थे। इसके बाद उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगीं। समय के साथ उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई और वे कर्ज के बोझ तले दब गए।
जीवन के अंतिम वर्षों में राजकुमार सक्सेना विभिन्न वृद्धाश्रमों में रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। गत 16 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें यूपीयूएमएस सैफई में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
अस्पताल प्रशासन और रक्तदाता समूह के संचालक शरद तिवारी ने परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया। बताया गया कि परिवार के सदस्यों ने उनसे वर्षों पहले संबंध समाप्त होने की बात कही। इसके बाद भी संस्था की टीम ने परिवार तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन कोई सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं आया।
मोर्चरी में निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद रक्तदाता समूह के सदस्य विमलेश तिवारी, जीतू कुशवाहा, अंकित राजावत, सौरभ परिहार, आदित्य प्रताप, अर्जुन एवं शरद तिवारी तथा सैफई थाना पुलिस के उप निरीक्षक राजीव कुमार और कांस्टेबल पर्वेंद्र के सहयोग से बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया गया।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु की कहानी नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश की एक मार्मिक तस्वीर भी प्रस्तुत करती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली, पारिवारिक विघटन और बढ़ती भौतिकवादी सोच के बीच रिश्तों में संवेदनशीलता का क्षरण चिंता का विषय बनता जा रहा है। वहीं, रक्तदाता समूह द्वारा निभाई गई मानवीय जिम्मेदारी ने यह भी साबित किया कि समाज में इंसानियत और सेवा भाव आज भी जीवित है।
इस हृदयविदारक घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर रिश्तों की अहमियत धन-संपत्ति से कहीं अधिक होती है और मानवीय संवेदनाएं ही समाज की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
