स्थानीय अशोकनगर स्थित गुरु पूर्णिमा आश्रम में वेदांताचार्य राज नारायण दीक्षित के पावन सानिध्य में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत श्रद्धालुओं ने भागवत एवं रामकथा का रसपान किया। इस अवसर पर कानपुर से पधारे भागवताचार्य शशिकांत पांडेय ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शुकदेव ने भागवत कथा केवल राजा परीक्षित के उद्धार के लिए नहीं, बल्कि समस्त जनकल्याण के उद्देश्य से सुनाई थी।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का मोह दूर करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया, उसी प्रकार भागवत महापुराण भी मानव कल्याण का महान ग्रंथ है। आचार्य पांडेय ने परीक्षित के जन्म और जीवन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे अभिमन्यु पुत्र को नष्ट करने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया था, किंतु भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से गर्भस्थ शिशु की रक्षा की। वही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित कहलाया।
उन्होंने बताया कि कलियुग के प्रभाव में परीक्षित द्वारा एक ऋषि के गले में मृत सर्प डालने पर ऋषिपुत्र ने उन्हें शाप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग उन्हें डसेगा। इसी प्रसंग के दौरान उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण प्राप्त हुआ। आचार्य पांडेय ने कहा कि भागवत महापुराण मोक्ष का ग्रंथ है और सात दिन तक श्रद्धापूर्वक इसके श्रवण से जीव सद्गति प्राप्त कर सकता है।
इससे पूर्व आचार्य देवेश अवस्थी ने श्रीराम कथा के अंतर्गत भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता कौशल्या और बालक राम के दिव्य स्वरूप से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक ओर राम पालने में शयन कर रहे थे और दूसरी ओर भगवान नारायण के रूप में नैवेद्य ग्रहण कर रहे थे। इस अद्भुत दृश्य को देखकर माता कौशल्या आश्चर्यचकित रह गईं। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने माता को अपना विराट स्वरूप दिखाया, जिसके प्रत्येक रोम में करोड़ों ब्रह्मांड विद्यमान थे।
कथावाचक ने काकभुशुंडि प्रसंग, भगवान राम की बाल लीलाएं तथा किशोरावस्था में राम-लक्ष्मण द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते हुए ताड़का और सुबाहु वध तथा मारीच को दूर समुद्र तट तक पहुंचाने की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया। साथ ही उन्होंने आसक्ति, विरक्ति और अनासक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराज जनक के जीवन्मुक्त जीवन का प्रेरक प्रसंग सुनाया।
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने वेदांताचार्य राज नारायण दीक्षित के नेतृत्व में भव्य आरती में सहभागिता की तथा प्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
