स्थानीय अशोकनगर स्थित गुरु पूर्णिमा आश्रम में चल रहे गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में विद्वान आचार्यों एवं कथा वाचकों ने धर्म, अध्यात्म और मोक्ष के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त किया।
महोत्सव की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वेदांताचार्य राज नारायण दीक्षित ने कहा कि मृत्यु लोक का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु है। संसार की समस्त भौतिक वस्तुएं यहीं रह जाती हैं, जबकि मनुष्य के साथ केवल उसके सत्कर्म, धर्म और पुण्य ही जाते हैं। उन्होंने जीवन को सार्थक बनाने के लिए धर्ममय आचरण अपनाने का आह्वान किया।
कानपुर से पधारे भागवताचार्य शशिकांत पांडेय ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह मोक्ष प्रदान करने वाला दिव्य ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का सात दिन तक श्रद्धापूर्वक श्रवण करने मात्र से जीव को सद्गति प्राप्त हो सकती है। विभिन्न उपाख्यानों के माध्यम से उन्होंने बताया कि मनुष्य का मन के वश में रहना उसके लिए अहितकर है, जबकि कल्याण और मोक्ष के लिए मन पर नियंत्रण आवश्यक है।
आचार्य देवेश अवस्थी ने चातुर्मास की महत्ता बताते हुए कहा कि देवशयनी एकादशी से देवोत्थनी एकादशी तक का समय आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना गया है। उन्होंने शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सावन में साग, भाद्रपद में दूध, क्वार में दही तथा कार्तिक मास में दाल के सेवन को वर्जित बताया। मदालसा उपाख्यान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सांसारिक कामनाएं त्याज्य हैं और यदि उनका त्याग संभव न हो तो मनुष्य को मोक्ष की कामना करनी चाहिए।
रामकथा के दौरान श्री शास्त्री ने राजा दशरथ और श्रवण कुमार प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शिकार के दौरान हुई भूलवश श्रवण कुमार की मृत्यु और उनके अंधे माता-पिता द्वारा दिए गए श्राप का प्रभाव अंततः राजा दशरथ के जीवन में दिखाई दिया। राम के वियोग में व्यथित होकर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
कार्यक्रम में सिरसागंज से पधारे विजय कुमार रामायणी तथाराज नारायण पाण्डेय ने भी रामचरितमानस पर आधारित प्रेरणादायी आध्यात्मिक प्रवचन प्रस्तुत किए।
संध्या बेला में श्रद्धालुओं नेआचार्य राज नारायण दीक्षित के नेतृत्व में सामूहिक आरती में भाग लिया तथा प्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया। महोत्सव के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
