नगर के पक्का तालाब परिसर में सोमवार को श्री श्री गौर निताई परिवार एवं ब्रह्म मध्व गौड़ीय सम्प्रदाय के तत्वावधान में आयोजित भगवान जगन्नाथ का दिव्य स्नान पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा परिसर भगवान जगन्नाथ के जयघोष और हरिनाम संकीर्तन से गुंजायमान रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

महोत्सव का शुभारंभ सायं 6 बजे भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलदेव और बहन सुभद्रा महारानी के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाअभिषेक के साथ हुआ। आयोजन समिति द्वारा इस वर्ष विशेष रूप से पवित्र नदियों का जल, सुगंधित इत्र, दिव्य औषधियां एवं वेदलक्षणा गाय के दूध से भगवान का स्नान कराया गया। भगवान के दिव्य स्नान और दर्शन के लिए इटावा सहित आसपास के जनपदों से सैकड़ों श्रद्धालु पक्का तालाब पहुंचे।
मुख्य स्नान के उपरांत भगवान का पंचामृत अभिषेक, औषधि अभिषेक तथा पवित्र गंगाजल से विशेष अभिषेक किया गया। इसके बाद जब भगवान के पट खोले गए तो श्रद्धालु उनके अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर भाव-विभोर हो उठे। पूरे परिसर में “हरे कृष्ण” तथा “जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामी भवतु” के जयघोष गूंजते रहे।
कार्यक्रम में सनातन धर्म प्रचारक पंडित मनुपुत्र दास ने स्नान पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन भगवान जगन्नाथ के स्नान स्वरूप के दर्शन करने मात्र से भक्तों के पापों का क्षय होता है और भक्ति मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म के सिद्धांतों एवं भगवान की भक्ति के महत्व से अवगत कराया।
इस अवसर पर त्रिदंडी स्वामी छ विष्णु पाद श्री श्रीमद् भक्ति गौरव केशव गौरवामी जी महाराज (हरे कृष्ण मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट) तथा तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज की शिक्षाओं और संदेशों का भी स्मरण किया गया। वक्ताओं ने सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समाज को आगे आने का आह्वान किया।
महोत्सव की विशेष आकर्षण भगवान के अभिषेक से प्राप्त पवित्र चरणामृत का वितरण रहा। आयोजन समिति द्वारा इस दिव्य जल प्रसाद को श्रद्धालुओं के बीच मटकों सहित वितरित किया गया, जिसे प्राप्त करने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया। इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन कर सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया।
देर रात तक चले इस भव्य धार्मिक आयोजन ने पक्का तालाब परिसर को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए आयोजन की सराहना की।
