सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस में एक साहित्यिक एवं चिंतनपरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें इटावा सदर विधायक सरिता भदौरिया तथा भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के निदेशक एवं प्रख्यात लेखक अभिषेक चौहान ‘अन्वेषी’ ने उनके चर्चित उपन्यास “उड़ चल अपने देश : परिवर्तन की आहट” का विवेचन किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, पत्रकारों एवं बुद्धिजीवियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

अपने संबोधन में लेखक अभिषेक चौहान ‘अन्वेषी’ ने कहा कि यह उपन्यास आगामी शताब्दी में संभावित सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय परिवर्तनों की कल्पना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी जिस दुनिया को आने वाली पीढ़ियों के लिए तैयार कर रही है, उसका सीधा प्रभाव उनके जीवन, संस्कृति और भविष्य पर पड़ेगा। इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशील बने।
उन्होंने कहा कि समाज और पर्यावरण के लिए कार्य करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी भी है। जब तक आमजन सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक व्यापक और स्थायी परिवर्तन संभव नहीं होगा। उन्होंने लोगों से प्रकृति संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया।
अभिषेक चौहान ने पलायन के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में लोगों को अपने गांवों और शहरों से दूर जाना पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति अपने मूल परिवेश और सामाजिक जड़ों से दूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी, हवा, पानी और समाज ने हमें पहचान और संस्कार दिए हैं, उसके प्रति हमारा नैतिक दायित्व है और हमें अपने मूल स्थान से भावनात्मक एवं सामाजिक रूप से जुड़े रहना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदर विधायक सरिता भदौरिया ने कहा कि व्यक्ति जीवन में कहीं भी पहुंच जाए, लेकिन एक समय ऐसा अवश्य आता है जब उसे अपने गांव, अपने देश और अपनी जड़ों की याद सताने लगती है। उन्होंने कहा कि समाज और गांव हमारे व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और किसी भी सामाजिक या राष्ट्रीय घटना का प्रभाव हर संवेदनशील व्यक्ति पर पड़ता है।
विधायक ने साहित्य, पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कवि, लेखक और पत्रकार समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। साहित्य सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है और ऐसी पुस्तकें समाज में जागरूकता एवं नई सोच विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साहित्य प्रेमियों और बुद्धिजीवियों ने उपन्यास “उड़ चल अपने देश : परिवर्तन की आहट” की सराहना करते हुए इसे सामाजिक चेतना, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण साहित्यिक प्रयास बताया।
इस अवसर पर राजवीर तोमर, दीपक दायपुरिया, विनोद पाराशर, ब्रजेंद्र, सचिन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
