बेरोजगार युवाओं को बनाएं आत्मनिर्भर: जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल

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इटावा, 23 मई 2026। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में कौशल विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कौशल प्रशिक्षण योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसएसडीएफ (SSDF), प्रवीण योजना सहित अन्य योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रशिक्षार्थियों के रोजगार पर विशेष जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि एसएसडीएफ योजना वर्ष 2025-26 के अंतर्गत निजी क्षेत्र में 513 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित था, जिसके सापेक्ष 496 प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन युवाओं का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है, उन्हें शीघ्र रोजगार से जोड़ा जाए ताकि प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ उन्हें मिल सके।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कुछ प्रशिक्षण प्रदाताओं की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लाट श्री बालकराम संस्थान द्वारा 108 युवाओं को प्रशिक्षण दिए जाने के बावजूद किसी को रोजगार नहीं मिला, जबकि श्री दत्त सेवा संस्थान ने 81 युवाओं को प्रशिक्षण दिया लेकिन रोजगार दिलाने में पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा प्रशिक्षण, जो युवाओं को रोजगार उपलब्ध न करा सके, उसका कोई औचित्य नहीं है। प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें रोजगार योग्य बनाना होना चाहिए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों और प्रशिक्षण प्रदाताओं को निर्देशित किया कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा युवाओं को तकनीकी और व्यवहारिक कौशल से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण तभी सार्थक होगा जब प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों।

राजकीय प्रशिक्षण संस्थानों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (GITI) के प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि पाठ्यक्रमों को विद्यार्थियों की आवश्यकता और रुचि के अनुरूप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि बदलते समय और रोजगार बाजार की मांग के अनुसार पाठ्यक्रमों में आवश्यक संशोधन और कस्टमाइजेशन किया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा मिल सके।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हैं, इसलिए उनकी रुचि, क्षमता और मानसिक स्तर का आकलन कर उन्हें उपयोगी कौशल उपलब्ध कराया जाए। कौशल प्रशिक्षण ऐसा हो जो युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाए और उन्हें रोजगार प्राप्त करने में सक्षम बनाए।

प्रवीण योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जीजीआईसी और जीआईसी के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को स्किल आधारित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि कई छात्र-छात्राएं इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा जारी नहीं रख पाते, ऐसे में कौशल प्रशिक्षण उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खोल सकता है।

जिलाधिकारी ने वर्तमान समय में डिजिटल स्किल, डेटा प्रबंधन एवं एक्सेल प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को इन विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण अवश्य दिया जाए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षकों की नियुक्ति और ऑनलाइन स्किल कोर्सेज को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए। साथ ही विद्यालयों और महाविद्यालयों में ऑनलाइन माध्यम से कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने पर बल दिया।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को कौशलयुक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी विद्यालय और महाविद्यालयों से बाहर निकलें तो वे स्किल्ड हों, न कि अनस्किल्ड। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थानों को गंभीरता, गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।

बैठक में जिला सेवायोजन अधिकारी विकास मिश्रा, जिला कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रदीप कुमार तिवारी, जीजीआईसी एवं जीआईसी के प्रधानाचार्य तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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