नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने आज राज्यसभा के सेवानिवृत्त सदस्यों को संबोधित करते हुए उनके योगदान की सराहना की और उन्हें सम्मानित करने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर सदन को दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर साझा भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे सदस्य सक्रिय राजनीति में लौटें या सामाजिक सेवा में योगदान दें, उनका अनुभव राष्ट्र के लिए हमेशा अमूल्य संपत्ति बना रहेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “राजनीति में कोई विराम नहीं होता; आपका अनुभव और योगदान राष्ट्र के जीवन का सदा हिस्सा रहेगा।”
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेताओं एच. डी. देवगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी के सांसदों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के मृदुभाषी स्वभाव और जटिल परिस्थितियों में सदन का विश्वास बनाए रखने की क्षमता की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय परंपराओं में आए बदलावों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 24 घंटे के मीडिया के दौर में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन हास्य और बुद्धिमत्ता की परंपरा आज भी संसदीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हर दो वर्ष में नए और पुराने सदस्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान सदन की समृद्ध विरासत को बनाए रखता है।
राज्यसभा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने “द्वितीय मत” की अवधारणा को लोकतंत्र की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों के बीच विचार-विमर्श से विधायी प्रक्रिया अधिक परिष्कृत और प्रभावी बनती है, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सेवानिवृत्त सांसदों को यह गौरव प्राप्त है कि उन्होंने पुराने और नए दोनों संसद भवनों में कार्य किया है। उन्होंने संसद को एक “महान खुला विश्वविद्यालय” बताते हुए कहा कि यहां बिताया गया समय जनसेवा और आत्म-विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सेवानिवृत्त सदस्यों का अनुभव और दूरदृष्टि भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने सभी सदस्यों की समर्पित सेवा को नमन करते हुए उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।
