राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की इटावा इकाई ने जिला पंचायत राज अधिकारी बनवारी सिंह से जुड़े एक वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से मामले की गंभीरता को देखते हुए वायरल वीडियो की निष्पक्ष, तथ्यात्मक और न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की इटावा इकाई के जिलाध्यक्ष अरविंद प्रताप सिंह धनगर एवं जिलामंत्री धर्मेंद्र यादव की ओर से संगठन के लेटरपैड पर यह ज्ञापन जिलाधिकारी को संबोधित कर प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर DPRO बनवारी सिंह का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे लेकर भ्रम और शंकाएं उत्पन्न हो रही हैं।
ज्ञापन में संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिला पंचायत राज विभाग में कार्यरत कर्मचारियों से संबंधित समस्याओं को लेकर जब-जब राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का प्रतिनिधिमंडल जिला पंचायत राज अधिकारी से मिला, तब-तब उन समस्याओं का समाधान बिना किसी भेदभाव के किया गया। संगठन का कहना है कि किसी भी कर्मचारी से किसी प्रकार का लेन-देन नहीं किया गया।
संगठन ने यह भी उल्लेख किया है कि उनके संज्ञान में DPRO बनवारी सिंह ने अपने पूरे कार्यकाल में सरकारी आचरण नियमावली के अंतर्गत शासकीय दायित्वों का निर्वहन किया है। उन्होंने शासन द्वारा निर्धारित नीतियों, दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं के अनुरूप कार्य करते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वायरल वीडियो की तकनीकी और तथ्यात्मक जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो किस अवधि का है, किस प्रकार बनाया गया है और इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई है। संगठन ने इस मामले में न्यायिक जांच की भी मांग की है। उल्लेखनीय है कि DPRO बनवारी सिंह से जुड़ा एक एआई-जनित वीडियो हाल ही में इटावा जनपद में वायरल हुआ था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई थीं।
इस प्रकरण में इटावा लाइव की फैक्ट-चेक टीम द्वारा वायरल वीडियो की स्वतंत्र जांच की गई थी। फैक्ट-चेक रिपोर्ट के अनुसार वीडियो के साथ छेड़छाड़ के संकेत मिले थे और उसके कुछ हिस्से अपने मूल स्वरूप में नहीं पाए गए थे। रिपोर्ट में वीडियो के आंशिक रूप से संपादित और एआई आधारित होने की बात सामने आई थी।

DPRO बनवारी सिंह के प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े आंकड़े भी इस दौरान चर्चा में आए हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार उनके कार्यकाल में धारा-95(1) के अंतर्गत जांच एवं कार्रवाई करते हुए कुल 17 ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं पर कार्रवाई की गई है। इन कार्रवाइयों के तहत कुल ₹47,25,833 की धनराशि की वसूली की गई है। यह वसूली विभागीय जांच, नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की गई, जिसका विवरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज है।
इसके अतिरिक्त, उनके कार्यकाल में 22 मृतक आश्रितों को सफाई कर्मियों के पद पर नियुक्ति दी गई। यह नियुक्तियां शासन की नीतियों, पात्रता मानकों और नियमानुसार की गईं । नियुक्त सफाई कर्मियों द्वारा यह बताया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी रही और किसी प्रकार की अनियमितता या दबाव नहीं देखा गया। कर्मचारियों के अनुसार पूरी प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न की गई। सफाई कर्मियों ने यह भी कहा कि जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा नियुक्तियों में निष्पक्षता और ईमानदारी का परिचय दिया गया, जिसे जनपद में एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में एआई-जनित या संपादित वीडियो के मामलों में जांच का दायरा केवल दृश्य सामग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके तकनीकी, समयगत और संदर्भीय पहलुओं की भी गहन पड़ताल आवश्यक होती है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर किसी अधिकारी के कार्यों या छवि पर टिप्पणी करने से पहले सत्यापन और जांच अनिवार्य है। संगठन का मानना है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और स्थिति स्पष्ट होगी।
