लखना:- नवरात्रि के पांचवें दिन शुक्रवार को देवी के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की गई। लखना नगर के ऐतिहासिक कालिका देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र माता के जयकारों से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने मां कालिका के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। दूर-दराज से आए देवी भक्तों ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराया और अपनी मन्नतें पूरी होने पर पूजा-अर्चना की। कई भक्त चिलचिलाती धूप में डीजे साउंड पर नाचते-थिरकते हुए झंडा चढ़ाने पहुंचे।
जैसे-जैसे अष्टमी नजदीक आ रही है, मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। पांचवें दिन भी भक्तों का तांता लगा रहा, जिसमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक थी। कानपुर, कानपुर देहात, औरैया, मैनपुरी, फिरोजाबाद सहित इटावा जनपद के नगरों और गांवों से भी देवी भक्त यहां पूजा-अर्चना करने आ रहे हैं।
कालिका मंदिर के पुजारी विनोद चौबे ने बताया कि मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता कहते हैं। कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से जाना जाता है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। यह कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इनकी पूजा-अर्चना करने से अद्भुत शक्ति का संचार होता है और सभी संकटों का नाश होता है।
सुरक्षा की दृष्टि से बकेवर थानाध्यक्ष विपिन मलिक और लखना चौकी इंचार्ज स्वदेश कुमार सहित अन्य थानों का पुलिस बल मुस्तैदी से तैनात रहा।
