आदिकाल से सनातन संस्कृति में श्रावण मास में शिवभक्त गंगामैया का जल भरकर अपने कन्धे पर रखकर दूर दूर से ( कांवर ) ले जाकर अपने गृह जनपदों में स्थित शिव मन्दिरों में जल चढाकर अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने या पूरा होने पर शिवजी को प्रणाम करते हैं .
इस संकल्प यात्रा में शिवभक्तों का रास्ते में प्रशासन , आम जन व व्यापारी सम्मान करें रास्ते में जो बन पडे उनका स्वागत करें और लोग बढचढकर स्वागत सम्मान करते भी हैं .।
आज देखने व सुनने में आ रहा है कि शिव भक्त ( कांवडिया ) रास्ते में आम जनमानस या व्यापारियों से अनजाने में कोई गलती हो जाती है तो उपद्रव करते हैं . मेरा मानना है कि ऐसे शिवभक्त अपनी पवित्र यात्रा को तो खंडित करते ही हैं साथ में भोलेनाथ का अपमान करते हैं . और कांवर यात्रा की गरिमा को गिराने का काम करते हैं . हम कांवर यात्रा को लेकर चलने पर सनातन संस्कृति , हिन्दूधर्म का सम्मान , आस्था व गरिमा बढाने का काम करते हैं लेकिन कुछ लोग यात्रा के दौरान उपद्रव कर कांवर यात्रा की गरिमा को ठेस पहुंचाकर कांवर की महत्ता को कम कर रहे हैं .
उ0 प्र0 उधोग व्यापार मन्डलल इटावा अपने सभी शिवभक्तों से अपील करता हैं कि वह श्रावण मास में निकलने वाली कांवर यात्रा को भव्यता के साथ शान्ती से पूराकर , हिन्दूधर्म की गरिमा को बढायें न कि कांबरिये के नाम पर उपद्रवी की पहचान न बनाये . रास्ते में अगर कोई व्यवधान डालता है तो प्रशासन उसपर कठोर कार्यवाही के लिये तैयार है .
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