संत विवेकानंद सीनियर सेकेंड्री पब्लिक स्कूल में एक सप्ताह तक चले वार्षिक स्पेक्ट्रम महोत्सव का समापन धूमधाम से हुआ। इस महोत्सव में स्कूल के कक्षा के जी से लेकर कक्षा 9 तक के हजारों छात्र-छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। खेलकूद के अलावा योगा, विज्ञान प्रदर्शनी, कला प्रदर्शनी और गायन प्रतियोगिता समेत लगभग 25 तरह के इवेंट्स का आयोजन किया गया, जिनमें छात्रों ने अपनी कला और कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में सीनियर, जूनियर और सब जूनियर वर्ग में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने अपने खेल कौशल का प्रदर्शन किया। इसके अलावा गायन, विज्ञान और कला प्रतियोगिता में भी छात्रों ने अपने प्रतिभा से सभी को मंत्रमुग्ध किया। इन प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विजयी प्रतिभागियों को स्कूल के प्रधानाचार्य और निदेशक डॉ. आनंद द्वारा मेडल पहनाकर और शील्ड देकर सम्मानित किया गया।

प्रधानाचार्य डॉ. आनंद ने इस अवसर पर कहा कि वार्षिक स्पेक्ट्रम महोत्सव में प्रतिभाग करने वाले छात्रों को वार्षिक परीक्षा के तनाव से छुटकारा मिलता है और वे खेलकूद की गतिविधियों में भाग लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेलकूद से बच्चों की मानसिक और शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है, जो उनकी पढ़ाई में मन लगाने में मदद करती है।

डॉ. आनंद ने आगे कहा कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहता है और वे अपनी प्रतिभा का विकास करते हैं। खेलकूद की प्रतियोगिताओं में जीतने और हारने वाले सभी बच्चों को समान रूप से प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि उनका मनोबल ऊँचा बना रहे। इसी उद्देश्य के साथ, इस महोत्सव में विजयी बच्चों के साथ ही भाग लेने वाले सभी छात्रों को मेडल और प्रमाण पत्र देकर उनकी हौसला अफजाई की गई।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक डॉ. विवेक यादव ने भी विजेता छात्रों को आशीर्वाद दिया और कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में एकता, सहयोग और संघर्ष की भावना का विकास होता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके उज्जवल भविष्य की कामना की और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
वार्षिक स्पेक्ट्रम महोत्सव का समापन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच एक खुशी और उत्साह का माहौल बनाकर हुआ। यह कार्यक्रम न केवल बच्चों की शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि यह उनकी समग्र व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देने वाला साबित हुआ।
