प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के इटावा में सबसे पुराने सेवा केंद्र (जी जी आई सी के सामने) के संस्थापक त्रिवेणी शरण अग्रवाल (93 वर्ष) के विगत शनिवार एकादशी को रात्रि में स्वर्गारोहण पश्चात आज बुधवार माघी पूर्णिमा को उठावनी एवं श्रद्धांजलि समारोह सेवाकेंद्र के निकट आशीर्वाद पैथेलॉजी के हाल में संपन्न हुआ।
फतेहगढ़ में जन्मे त्रिवेणी शरण अग्रवाल का फतेहगढ़ और इटावा के जसवंतनगर में 1967 में स्थापित कोल्ड स्टोरेज का व्यवसाय था, जो अराजकता और व्यवसाय में जबरन वसूली और शिकायतों पर धमकियों आदि के कारण 1980 में बंद कर दिया गया। उन्होंने धनार्जन के लिए कभी अनीति का सहारा नही लिया और न ही अराजकता के समक्ष समर्पण ही किया,बल्कि खुद को ईश्वरीय सेवा में समर्पित कर बच्चों के भी वैराग्य के प्रति आकर्षण को सहजता पूर्वक स्वीकार कर लिया।

स्वर्गीय अग्रवाल 1970 में पहली बार माउंट आबू गए थे,जिसके बाद उनके परिवार का मन शिव बाबा की सेवा में रम गया। चौगुर्जी में मिश्रा भवन में किराए पर रहते हुए 1975 में उन्होंने सेवा केंद्र स्थापित किया और अगले वर्ष जी०जी०आई० सी० के सामने निजी घर खरीद कर वहां से सेवा केंद्र संचालित करना प्रारंभ किया जो वर्तमान तक उनके चारो पुत्र पुत्रियों ने अविवाहित रहने का संकल्प लेकर चलाना जारी रखा हुआ है।
उनकी पत्नी स्वर्गीय रेशम बहिन ,उनकी सेंट मैरी में शिक्षिका रही पुत्री स्वर्गीय बी के मंजू, के बाद से अब तक बी के नीलम, बी के प्रीति और अकेले पुत्र बी के पंकज ने राजयोगियों की सेवा में अपने सेवाकेंद्र की समर्पित साधना सेवा से देशभर के सेवा केंद्रों में अलग पहचान बनाई और विशिष्ट यश कीर्ति अर्जित करते हुए ईश्वरीय विश्वविद्यालय की दादियों से सदैव विशेष स्नेह आशीर्वाद भी अर्जित किया है,जिसका प्रत्यक्ष दर्शन इटावा के पचासों पत्रकार समाजसेवी, शिक्षाविद,शिक्षक, आदि विगत चार दशक में कर चुके हैं, तथा पत्रकार आदि शिविरों में माउंट आबू जाकर ज्ञानार्जन से लाभान्वित भी हो चुके हैं।

उनकी सेवाओं को स्मरण करते हुए सेवाकेंद्र से चार दशक पूर्व से संबद्ध स्तंभकार गणेश ज्ञानार्थी ने अपनी विज्ञप्ति में प्रातः स्मरणीय त्रिवेणी शरण जी को अद्वितीय समर्पित संत की संज्ञा दी जिन्होंने अपनी विनम्र दानशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर अपने पूरे जीवन एवं परिवार को भी ज्ञान अध्यात्म प्रसार की सेवा में समर्पित कर दिया, इसलिए उन जैसी कोई दूसरी मिसाल मिलना इस युग में संभव नही हो पाया है।
विगत रविवार को श्रीमदभागवत गीता में भगवान कृष्ण के वचनों का स्मरण कराते उनके मृत्यु उत्सव की झलक प्रस्तुत करते हुए पूरे गाजे बाजे के साथ ज्ञानयोगी त्रिवेणी शरण की विशाल अंतिम यात्रा अपनों के भारी हुजूम के साथ श्री यमुना तट पर पहुंची जहां बी के पंकज ने उन्हें मुखाग्नि दी। आज उठावनी और श्रद्धांजलि समारोह मे वक्ताओं ने पूरे श्रद्धाभाव से उनके समर्पित कर्मयोगी व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया।

इस अवसर पर मंच पर स्थापित उनके चित्र पर माल्यार्पण पश्चात कानपुर से पधारी जोन इंचार्ज बी के गिरिजा, बी के अनीता भरथना, बी के ज्योति कामेथ, प्रो० आर के अग्रवाल, डा० विनय कश्यप, डा०हिमांशु यादव, प्रो०उदयवीर यादव, अग्रवाल महिला सभा की अध्यक्षा निधि अग्रवाल, अग्रवाल सभा अध्यक्ष राजेश, महामंत्री बलराज गर्ग, अग्रवाल विकास ट्रस्ट के मंत्री मनोज अग्रवाल आदि दर्जनों लोगों ने नम नेत्रों ने उनको याद किया। शिखा अग्रवाल ने गीत सुनाया, कु० एकता ने कविता सुनाई।
सेवाकेंद्र के नियमित सहयोगी यशोदा, दीप्ति, अनीता, बी के शकुंतला, गुड्डी एवं बी के अरुण,बी के वीरेंद्र,बी के महेश,बी के उमाशंकर, बी के आदेश आदि भाई बहिनों ने भव्य आयोजन एवं प्रसाद वितरण की उत्कृष्ट व्यवस्था की।

राजयोग ज्ञान आध्यात्म योग की शिक्षा प्रशिक्षण प्रसार के लिए जीवन के स्वयं इक्यावन वर्ष और अपने पूरे परिवार को समर्पित करने वाले असाधारण सत्पुरुष त्रिवेणी शरण की सेवाओं को इटावा में अनंत काल तक याद रखा जाएगा। पत्रकारिता परिवारों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।
