आचार्य आदिसागर अंकलीकर इंटर कालेज में तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज का जन्मदिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक विशुन कुमार चौधरी ने आचार्य सन्मति सागर की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने णमोकार मंत्र, वंदना और भजन पर नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक हो गया।
प्रबंधक विशुन कुमार चौधरी ने आचार्य सन्मति सागर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 18 वर्ष की आयु में आचार्य महावीर कीर्ति महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत लिया था और उस समय से उन्होंने नमक का त्याग कर दिया। इसके बाद उन्होंने घी, शक्कर, अन्न आदि का भी त्याग किया। यही कारण है कि उन्हें तपस्वी सम्राट कहा जाता है। उनकी तपस्या और साधना ने समाज को एक नई दिशा दी है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या सोहिनी यादव ने कहा कि आचार्य सन्मति सागर एक युग संत थे और शिक्षा व ज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने जो योगदान दिया है, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन प्रेरणा का स्रोत है और उनके द्वारा किए गए कार्यों को हमेशा याद रखा जाएगा।
इस मौके पर विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. उज्ज्वल यादव ने भी अपने विचार साझा किए और आचार्य सन्मति सागर की शिक्षा और तपस्या के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि आचार्य सन्मति सागर के मार्गदर्शन से ही समाज में सकारात्मक बदलाव आए। इसके बाद, डॉ. उज्ज्वल यादव ने जिला अस्पताल में मरीजों को फल वितरित किए और उन्हें आचार्य सन्मति सागर की शिक्षाओं का पालन करने के लिए प्रेरित किया।
