इटावा। सरकार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर रही है, ताकि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके। लेकिन जनपद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति कुछ ठीक नहीं है। यहां अधिकांश प्रसव स्टाफ नर्सों द्वारा कराए जा रहे हैं। जब प्रसव के दौरान हालात गंभीर हो जाते हैं, तो गर्भवती महिला को रेफर कर दिया जाता है, जिससे कई बार उनकी जान पर भी बन आती है। इसकी मुख्य वजह स्वास्थ्य विभाग में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी है।
जनपद के 35 सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ 13 महिला चिकित्सक तैनात हैं, जो बहुत ही कम हैं। जबकि, इन केंद्रों पर प्रसव के लिए महिला चिकित्सक की जरूरत होती है, ताकि प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता को समय रहते निपटाया जा सके। इसके चलते कई बार गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति महिलाओं के लिए चिंता का कारण बन गई है, क्योंकि उन्हें सुरक्षित प्रसव की आवश्यकता है।
भीमराव आंबेडकर महिला जिला अस्पताल में 6 महिला चिकित्सक तैनात हैं, जिनमें चार स्त्री रोग विशेषज्ञ और दो मेडिकल ऑफिसर हैं। हालांकि, इन चिकित्सकों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार लगाई जाती है, जिससे कई बार चिकित्सक की उपलब्धता प्रभावित होती है। अस्पताल में 1 जनवरी से अब तक कई प्रसव हुए हैं, लेकिन इनकी संख्या काफी बढ़ने के कारण चिकित्सकों के लिए समस्या उत्पन्न हो रही है।
गर्भवती महिलाओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को वही सही तरीके से देख सकती हैं। चिकित्सक की अनुपस्थिति में नर्स द्वारा प्रसव कराना कभी-कभी जोखिमपूर्ण हो सकता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य विभाग महिला चिकित्सकों की संख्या बढ़ाए, ताकि महिला स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
