अंजुमन हुसैनिया कमेटी के तत्वावधान में इस्लामिया इंटर कॉलेज, इटावा के मैदान में पहली बार बड़े पैमाने पर एजुकेशनल कैरियर काउंसलिंग कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दिल्ली, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विद्वानों और विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को उनके भविष्य निर्माण के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
डॉ. सैयद मो. फजलुल्लाह चिश्ती (संस्थापक एवं निदेशक, फला रिसर्च फाउंडेशन, दिल्ली) समीर सिद्दीकी (एलिफ एकेडमी, दिल्ली) डॉ. मोहिबुल हक (प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, एएमयू, अलीगढ़) मो. अजमल अब्बासी (दिल्ली) सैयद जैनुल आबेदीन (लखनऊ) मो. आसिम (शिक्षाविद) कार्यक्रम का पहला सत्र सुबह 10 बजे से 2 बजे तक चला, जिसमें विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उनके कैरियर विकल्पों और शिक्षा के महत्व पर संबोधित किया।

डॉ. समीर सिद्दीकी ने कहा, “इटावा की इस्लामिया इंटर कॉलेज की ऐतिहासिक धरती पर आकर बेहद खुशी हो रही है। यह वही जगह है जहां भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन जैसे महान व्यक्तित्व ने शिक्षा प्राप्त की थी।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के लिए एक ऐसा सकारात्मक माहौल बनाएं, जिसमें वे न केवल शिक्षित बल्कि आत्मनिर्भर भी बन सकें।

प्रोफेसर मोहिबुल हक ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, “आपके कैरियर के विकल्प सिर्फ यूपीएससी तक सीमित नहीं हैं। आपको संयुक्त राष्ट्र (United Nations) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए।”
दोपहर बाद, 4 बजे तक चले दूसरे सत्र में विद्यार्थियों के लिए व्यक्तिगत कैरियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए और विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
यह कैरियर काउंसलिंग कॉन्फ्रेंस इटावा में अपनी तरह का पहला और सबसे बड़ा आयोजन रहा, जिसमें शहर भर के 1,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के प्रोफेसर एवं शिक्षा विशेषज्ञ भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस सफल आयोजन के पीछे अंजुमन हुसैनिया कमेटी के सदस्यों का अहम योगदान रहा, जिनमें हाजी वसीम, हाजी दिलशाद, हाजी इलियास राइन, हाजी सकलैन, असरार अहमद, मो. शुऐब रूमी, मौजुद्दीन, खुर्शीद अहमद, कासिम फारूकी, साबिर राइन, शकील आदि शामिल थे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक और आधुनिक कैरियर विकल्पों के बारे में जागरूक करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रेरित करना था। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा ही वह मजबूत आधार है, जो न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे समाज को सशक्त बना सकती है।
