इटावा। जनपद के 1,484 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की सुरक्षा के मानकों का अभी तक सही आकलन नहीं किया गया है। कई विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उठ रही हैं, क्योंकि कुछ विद्यालयों के भवन जर्जर हैं और इनका निर्माण भूकंपरोधी विधि से नहीं किया गया है। इस कारण नौनिहालों की जान जोखिम में डाली जा रही है।

कुछ विद्यालयों के भवन इतने जर्जर हो गए हैं कि पिछले साल इनकी नीलामी की गई थी, लेकिन इनके स्थान पर नए भवनों के निर्माण के लिए शासन से बजट नहीं आया है। ऐसे में इन विद्यालयों को खुले स्थानों या गांव के किसी घर में संचालित किया जा रहा है। हालांकि, शिक्षक बच्चों को आपदा की स्थिति में सुरक्षा के उपायों के बारे में जागरूक करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह स्थिति शिक्षा का वातावरण सुरक्षित नहीं बना रही है।
इसी बीच, सभी विद्यालयों के किचिन में अग्निशामक यंत्र लगाए गए हैं। यह यंत्र प्रयोग में आएं या नहीं, उनकी रिफलिंग वित्तीय वर्ष के अंत तक एक बार कराने का नियम है। आकस्मिक स्थिति में यंत्र का एक बार उपयोग किया जा सकता है, लेकिन अगर उनका रख-रखाव ठीक से न हो, तो ये यंत्र प्रभावी साबित नहीं होंगे।
