इटावा ठंड का कहर जिले में बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ठंडा रहा। इस कड़क ठंड से आम जनमानस कंपकंपा उठे, और लोग सर्दी से राहत पाने के उपायों में जुटे रहे।

सुबह साढ़े 12 बजे तक घना कोहरा और धुंध छाया रहा, जिससे दृश्यता में कमी आई। इस कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। खासकर, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह दिन काफी मुश्किलों भरा था, क्योंकि वे सिकुड़ते हुए और रजाई लपेटे हुए स्कूल गए। हालांकि, ठंड की वजह से कई बच्चे स्कूल ही नहीं गए।

ठंड की यह मार सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सरकारी कार्यालयों, बाज़ारों और अन्य स्थानों पर भी इसका असर देखा गया। लोगों ने अलाव और हीटर से गर्मी पाने का प्रयास किया। व्यापारिक प्रतिष्ठान और कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदार और कर्मचारी सर्द हवाओं से बचने के लिए अपने-अपने तरीके से गर्माहट जुटाने में व्यस्त थे। कई स्थानों पर ब्लोवर्स और हीटर का इस्तेमाल किया गया।

जिले में पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी क्षेत्रों में भी साफ देखा जा रहा है। लगातार तापमान में गिरावट हो रही है, जिससे ठंड की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। इस बदलाव के कारण लोगों की दिनचर्या में भी बदलाव आया है। दिन के समय भी लोग घरों में ही रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं और बाहर जाने से बच रहे हैं।

दोपहर करीब ढाई बजे जब धूप निकली, तो लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि ठंड से राहत मिलेगी। लेकिन सर्द हवाओं के बीच धूप भी बेअसर साबित हुई। सूर्य देव के अस्त होते ही ठंडक और भी अधिक बढ़ गई, जिससे सर्दी का असर और तीव्र हो गया।
इस बढ़ती ठंड के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को अलर्ट किया है। उन्होंने कहा है कि इस मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए उचित कपड़े पहनना, गर्म पानी पीना और बाहर कम समय के लिए निकलना चाहिए। साथ ही, ठंड के कारण बीमारियों के जोखिम को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सर्दी की इस कड़ी मार से लोग परेशान तो हैं, लेकिन अब उनका ध्यान गर्मी पाने के लिए साधनों की व्यवस्था पर है। ठंड से बचने के लिए इटावा के नागरिक अब अपने-अपने घरों में अधिक समय बिता रहे हैं और हरसंभव तरीके से खुद को गर्म रखने का प्रयास कर रहे हैं।
