यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त रखने और जनपद में स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में आयोजित जिला गंगा एवं वृक्षारोपण समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि यमुना नदी में एक बूंद भी गंदा पानी नहीं जाना चाहिए। जनपद के सभी तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी क्षमता के साथ नियमित रूप से संचालित किए जाएं। बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण, जल निकायों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में कहीं भी कूड़ा-कचरा और बायोमेडिकल वेस्ट खुले में नहीं फेंका जाना चाहिए। स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने गुरुकृपा पैथोलॉजी द्वारा जिलाधिकारी आवास के पीछे बायोमेडिकल वेस्ट फेंके जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। संबंधित पैथोलॉजी को तत्काल नोटिस जारी करने, मौके पर पड़े बायोमेडिकल वेस्ट को हटवाने और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए पैथोलॉजी का संचालन बंद कराने के निर्देश दिए। जिला चिकित्सालय में पड़े बायोमेडिकल वेस्ट को भी तत्काल हटवाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को निर्देशित किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के सैफई डिपो की कार्यशाला के आसपास कूड़ा डाले जाने पर संबंधित को नोटिस जारी करने और भविष्य में वहां कूड़ा न डालने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने को कहा। लखना के ग्राम मानपुरा के निकट स्थित तालाब की सफाई कराने तथा बकेवर बाईपास के किनारे पड़े कूड़े को तत्काल हटवाने के निर्देश भी दिए।
जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित तीनों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी एसटीपी पूरी क्षमता से नियमित रूप से चलते रहने चाहिए। किसी भी स्थिति में बिना उपचारित गंदा पानी नदियों में प्रवाहित नहीं होना चाहिए। संबंधित अधिकारी एसटीपी के संचालन और उपचारित जल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करें।
आवास विकास कॉलोनी में डाले जा रहे कूड़े को तत्काल हटवाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कूड़ा डालने में प्रयुक्त वाहन संख्या 3705 के मामले में अधिशासी अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। साथ ही जनपद में शत-प्रतिशत जियो टैगिंग सुनिश्चित कराने पर जोर दिया।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़े का संग्रहण और निस्तारण आरआरसी (RRC) केंद्रों के माध्यम से कराया जाए। वहीं नगरीय क्षेत्रों में एकत्रित कचरे को एमआरएफ (MRF) केंद्रों तक पहुंचाकर उसका नियमानुसार पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी परिस्थिति में कूड़ा खुले स्थानों, तालाबों या नदियों के किनारे नहीं डाला जाना चाहिए। सभी निकायों में कूड़ा संग्रहण वाहनों के माध्यम से नियमित रूप से कचरा उठाने की व्यवस्था की जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और नदियों की स्वच्छता शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से ठोस अपशिष्ट और दूषित जल के उचित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में सामाजिक निदेशक वानिकी अभिषेक अजित इनामदार, सिटी मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बहादुर, जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल सिंह, सीओ ट्रैफिक, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद संतोष कुमार मिश्रा, डीपीओ नमामि गंगे संजीव चौहान, जेआरएफ पर्यावरण निदेशालय डॉ. संगीता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
