इटावा, 26 अक्टूबर 2026। जनपद इटावा में महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर शहर के बतख तलैया, कटरा शमशेर खां स्थित प्राचीन श्री श्री 1008 महर्षि वाल्मीकि मंदिर में दिव्य पूजन एवं 24 घंटे के वाल्मीकि रामायण पाठ का आयोजन किया गया। संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, रामायण पाठ, सुंदरकांड और भजन-कीर्तन से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ संत-महात्माओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:30 बजे भगवान महर्षि वाल्मीकि के दिव्य पूजन के साथ हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सदर विधायक श्रीमती सरिता भदौरिया ने अपने कर-कमलों से भगवान महर्षि वाल्मीकि का विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन किया। इस दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कराए गए तथा महर्षि वाल्मीकि के प्रति श्रद्धा और आस्था व्यक्त की गई।
पूजन के उपरांत वाल्मीकि रामायण का पाठ प्रारंभ हुआ। 24 घंटे तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में रामायण के प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, धर्म और कर्तव्य के संदेश को स्मरण किया गया। सुंदरकांड पाठ के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-पाठ और रामायण पाठ किया गया। संत-महात्माओं की उपस्थिति में धार्मिक विधि-विधान के साथ अनुष्ठान संपन्न कराए गए। स्थानीय लोगों ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में सहभागिता की।
रामायण पाठ और सुंदरकांड के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। महर्षि वाल्मीकि मंदिर में जुटे श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का संदेश प्राप्त किया।
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके महान साहित्यिक एवं आध्यात्मिक योगदान का स्मरण किया गया। महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि के रूप में जाना जाता है। उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना कर भारतीय साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को समृद्ध किया। उनकी रचना में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, सत्य, त्याग, कर्तव्य और धर्म के संदेश का वर्णन मिलता है।
रामायण के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि ने ऐसे जीवन मूल्यों को प्रस्तुत किया, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके विचारों और रचनाओं ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को नैतिकता, आदर्श आचरण और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा दी है।
कार्यक्रम के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन, विचारों और उनकी महान साहित्यिक विरासत को स्मरण करते हुए लोगों को भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में सद्भाव, नैतिकता तथा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने की प्रेरणा ली।
संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर जनपद के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी संगीतमय सुंदरकांड, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें जसवंतनगर स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर, भरथना के रमायन स्थित श्री गंगाधर विश्वनाथ धाम मंदिर, इटावा की साईं विहार कॉलोनी स्थित श्री मारुति नंदन हनुमान मंदिर तथा चकरनगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर शामिल रहे।
इन धार्मिक स्थलों पर संस्कृति विभाग के कलाकारों द्वारा संगीतमय सुंदरकांड पाठ, भजन और कीर्तन की प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बनाया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने इन कार्यक्रमों में सहभागिता कर धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
जिले के विभिन्न मंदिरों में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के विचारों और उनकी साहित्यिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना तथा लोगों को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना रहा।
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आयोजित पूजन, वाल्मीकि रामायण पाठ, सुंदरकांड, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों ने जनपद में श्रद्धा एवं भक्ति का वातावरण निर्मित किया। प्राचीन महर्षि वाल्मीकि मंदिर में आयोजित 24 घंटे के रामायण पाठ के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों और महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं से जुड़ने का अवसर मिला।
इस पावन अवसर पर महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को आत्मसात करने, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने तथा भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित रखने का संदेश दिया गया। संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया।
