ऊसराहार। जनकपुर में भगवान श्रीराम के हाथों भगवान शिव का धनुष टूटते ही पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। धनुष भंग की लीला के बाद भगवान परशुराम के क्रोधित होकर सभा में पहुंचने और लक्ष्मण के साथ हुए तीखे संवाद ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। परशुराम के रौद्र रूप और लक्ष्मण के निर्भीक जवाबों ने मंचन को जीवंत बना दिया। श्री रामलीला महोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव के तीसरे दिन जनक विलाप, धनुष भंग, रावण-बाणासुर संवाद तथा परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीलाओं का सजीव मंचन किया गया। देर तक दर्शक रामलीला के विभिन्न प्रसंगों में डूबे रहे और कलाकारों के अभिनय की सराहना करते नजर आए।

रामलीला महोत्सव के तीसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता ने भगवान श्रीराम की आरती उतारकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों की पाठशाला है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके आदर्श आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने प्राचीन काल में थे।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आचरण से मर्यादा और कर्तव्यपालन का संदेश दिया। वहीं लक्ष्मण का अपने बड़े भाई के प्रति समर्पण, त्याग और माता-पिता के प्रति सम्मान हमें पारिवारिक रिश्तों की अहमियत समझाता है। रामलीला के माध्यम से इन आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जाता है।
अरुण गुप्ता ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आदर्श जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर ही एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने रामलीला के आयोजन को भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस दौरान श्री रामलीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष अरविंद गुप्ता, प्रबंधक ज्ञानेन्द्र अवस्थी, आरिफ खान और जितेंद्र पाल ने भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
रामलीला मंचन के दौरान मिथिला के राजा जनक की सभा में सीता स्वयंवर का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। माता सीता के स्वयंवर में देश-विदेश से आए अनेक राजा-महाराजा भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी राजा इसमें सफल नहीं हो पाता। राजाओं की असफलता से राजा जनक चिंतित हो उठते हैं और सभा में उपस्थित वीरों की क्षमता पर निराशा व्यक्त करते हैं।
इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम शिव धनुष के समीप पहुंचते हैं। भगवान श्रीराम सहज भाव से धनुष को उठाते हैं और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते ही धनुष टूट जाता है। धनुष टूटने की गूंज के साथ ही पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठता है। दर्शक जयकारे लगाकर भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। धनुष भंग का यह दृश्य रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
शिवजी के धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम मिथिला पहुंचते हैं। जब वह राजा जनक की सभा में पहुंचकर शिव धनुष को दो टुकड़ों में जमीन पर पड़ा देखते हैं, तो उनका क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। भगवान शिव के धनुष को टूटा देखकर वह सभा में उपस्थित राजाओं से पूछते हैं कि आखिर किसने यह दुस्साहस किया है।
भगवान परशुराम के रौद्र रूप को देखकर सभा में मौजूद राजा-महाराजा सहम जाते हैं। परशुराम क्रोधित होकर धनुष तोड़ने वाले को सामने आने के लिए ललकारते हैं। वह चेतावनी देते हैं कि जिसने भी धनुष तोड़ा है, वह सभा से बाहर आ जाए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे और सभी राजा उनके क्रोध का शिकार हो सकते हैं।
परशुराम के क्रोधपूर्ण संवादों से सभा में तनाव का वातावरण बन जाता है। उनके आक्रामक तेवर और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को प्रसंग से जोड़ दिया।
भगवान परशुराम के क्रोध के बीच लक्ष्मण का निर्भीक अंदाज देखने को मिला। परशुराम के कठोर शब्दों और धनुष तोड़ने वाले को दंडित करने की चेतावनी पर लक्ष्मण भी व्यंग्यपूर्ण जवाब देते हैं। इसके बाद दोनों के बीच तीखा संवाद शुरू हो जाता है। परशुराम जहां शिव धनुष टूटने को अपने आराध्य भगवान शिव के अपमान से जोड़कर देखते हैं, वहीं लक्ष्मण अपने तर्कों और व्यंग्य से उनके क्रोध का जवाब देते हैं।
लक्ष्मण के निर्भीक संवाद सुनकर दर्शक रोमांचित हो उठते हैं। दोनों पात्रों के बीच चलने वाले तर्क-वितर्क के दौरान मंच पर तनाव और हास्य का अनूठा संगम दिखाई देता है। भगवान परशुराम का रौद्र रूप और लक्ष्मण की वाक्पटुता इस प्रसंग को खास बनाते हैं। कलाकारों ने संवादों और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से प्रसंग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
रामलीला में परशुराम की भूमिका ब्रह्मचारी बाबा पिलुआ वाले ने निभाई, जबकि लक्ष्मण की भूमिका कमलेश ने अदा की। दोनों कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। धनुष भंग से लेकर परशुराम-लक्ष्मण संवाद तक प्रस्तुत की गई लीलाओं ने रामलीला महोत्सव के तीसरे दिन को यादगार बना दिया।
श्री रामलीला महोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों और भारतीय धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला। रामलीला परिसर में उपस्थित दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ मंचन का आनंद लिया।
