ऊसराहार, इटावा। ताखा क्षेत्र में शुक्रवार से शुरू हुई मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बेमौसम बारिश के चलते खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल बड़े पैमाने पर गिर गई है, जिससे किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। धान के साथ-साथ बाजरा की फसल को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है।
सबसे अधिक प्रभावित ताखा का पचार क्षेत्र हुआ है, जिसे इलाके में धान उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। सरसईनावर, कुईता, कौआ, मामन, समथर, अमथरी, रम्मपुरा, ताखा, भरतपुर, पुरैला और ऊसराहार सहित करीब 40 ग्राम पंचायतों में हजारों बीघा क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि कई स्थानों पर खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार थी और कई गांवों में कटाई शुरू होने वाली थी। ऐसे समय में हुई बारिश ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में गिरी फसल के दाने पानी में डूबने से सड़ने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को डर है कि खराब गुणवत्ता के कारण उन्हें बाजार में उचित मूल्य भी नहीं मिल पाएगा।
प्रभावित किसानों ने बताया कि खाद, बीज, जुताई और सिंचाई पर पहले ही भारी खर्च किया जा चुका है। अब फसल खराब होने से लागत निकलना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि पूरे वर्ष की मेहनत और उम्मीदें इस बारिश ने ध्वस्त कर दी हैं।
पचार क्षेत्र समेत ताखा के किसानों ने शासन-प्रशासन से तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की है। किसानों ने कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीमों को प्रभावित गांवों में भेजकर नुकसान का सर्वेक्षण कराने तथा फसल क्षति के आधार पर शीघ्र मुआवजा दिलाने की अपील की है, ताकि संकट की इस घड़ी में अन्नदाताओं को राहत मिल सके।
