घर में टेबल फैन के पीछे निकला खतरनाक काला कोबरा, सर्पमित्र ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

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बदलते मौसम के साथ अब सांप भी सक्रिय होने लगे हैं। इसी क्रम में सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत घटिया मिश्रान में उस समय हड़कंप मच गया जब एक घर के कमरे में टेबल फैन के पीछे खतरनाक काला कोबरा सांप दिखाई दे गया। सांप को देखते ही घरवालों के होश उड़ गए।

घटना की जानकारी मिलते ही उमेश मिश्रा ने तुरंत स्नेक बाइट हेल्पलाइन नंबर 7017204213 पर संपर्क कर सर्पमित्र एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. आशीष त्रिपाठी को सूचना दी। सूचना मिलते ही डॉ. त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान चलाते हुए कोबरा सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। इसके बाद घर के लोगों और आसपास के मोहल्लेवासियों ने राहत की सांस ली।

घटना की प्रत्यक्षदर्शी 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला राम श्री ने बताया कि वह कमरे में अपना बिस्तर लगा रही थीं। पास में रखे टेबल फैन में काला कोबरा लिपटा बैठा था। कमरे में अंधेरा होने के कारण उन्हें सांप दिखाई नहीं दिया। उन्होंने बताया कि उनकी हाल ही में आंखों का ऑपरेशन हुआ है, इसलिए स्पष्ट दिखाई भी नहीं दे रहा था। जैसे ही उनका हाथ पंखे के पास पहुंचा, सांप ने काटने का प्रयास किया, लेकिन ईश्वर की कृपा से वह बाल-बाल बच गईं।

रेस्क्यू के बाद कोबरा सांप को सामाजिक वानिकी विभाग इटावा के दिशा-निर्देशन में उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

वन्यजीव विशेषज्ञ एवं सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी ने मौके पर मौजूद लोगों को बदलते मौसम में विशेष सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह एक विषैला नर स्पेक्टिकल कोबरा था, जिसका वैज्ञानिक नाम नाजा नाजा (Naja naja) है। इस प्रजाति में बेहद खतरनाक न्यूरोटॉक्सिक विष होता है, जिसके दंश के बाद समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सभी सांप जहरीले नहीं होते। यदि किसी को सर्पदंश हो जाए तो घबराने की बजाय शांत रहें, क्योंकि अत्यधिक घबराहट से हार्ट अटैक जैसी स्थिति भी बन सकती है।

उन्होंने बताया कि सर्पदंश होने पर घाव के ऊपर हल्का बंध लगाकर एक से डेढ़ घंटे के भीतर जिला अस्पताल इटावा के इमरजेंसी वार्ड (कमरा नंबर 3) या सैफई पीजीआई के इमरजेंसी वार्ड में तुरंत पहुंचना चाहिए।

डॉ. त्रिपाठी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अंधविश्वास में पड़कर झाड़-फूंक कराने से बचें, क्योंकि इससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है।

पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्य कर रही संस्था “ओशन” के महासचिव डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि संस्था द्वारा चलाए जा रहे सर्पदंश जागरूकता अभियान के बाद जनपद में सर्पदंश से होने वाली मौतों में लगातार कमी आई है। साथ ही लोगों में वन्यजीवों को न मारने और उन्हें सुरक्षित बचाने की जागरूकता भी बढ़ी है, जो इटावा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

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