कर्नाटक। राष्ट्रपति ने सिद्धगंगा मठ द्वारा किए जा रहे समाजसेवी और शैक्षणिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मठ स्वामीजी की नेक कार्यों की विरासत को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि मठ प्राथमिक विद्यालय स्तर से लेकर इंजीनियरिंग और प्रबंधन तक उच्च शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। साथ ही, शिवकुमार स्वामी के मार्गदर्शन में स्थापित सिद्धगंगा अस्पताल द्वारा आम जनता को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान किए जाने की भी उन्होंने प्रशंसा की।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिद्धगंगा मठ समकालीन युग में सेवा और आध्यात्मिकता की सदियों पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए उसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान के वरदान को अत्यधिक महत्व दिया गया है। शिक्षा को व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि यही आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती है।

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मठ समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित छात्रों को शिक्षा प्रदान कर एक समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि परिश्रम, जनसेवा और राष्ट्रसेवा आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और आध्यात्मिकता इन दोनों के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है। उन्होंने कर्नाटक को जनसेवा, राष्ट्रसेवा, आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रगति का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए राज्य के परिश्रमी और प्रतिभाशाली लोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के लोगों ने राष्ट्र निर्माण में निरंतर अग्रणी भूमिका निभाई है और भविष्य में भी यह राज्य देश के विकास का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र निर्माण, परोपकार और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा के मार्ग पर चलकर ही हम श्री शिवकुमार स्वामीजी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।
