नई दिल्ली/कोलकाता। भारतीय नौसेना को स्वदेशी क्षमता में एक बड़ी मजबूती देते हुए युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा संचालित अंतिम सर्वेक्षण पोत ‘संशोधक’ (यार्ड 3028) को 30 मार्च 2026 को औपचारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया गया। इस अत्याधुनिक पोत का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, कोलकाता में किया गया है।
चार बड़े सर्वेक्षण पोतों के निर्माण के लिए अनुबंध 30 अक्टूबर 2018 को हस्ताक्षरित हुआ था। इसी श्रृंखला के अन्य पोत—आईएनएस संधायक, आईएनएस निर्देशक और आईएनएस इक्षक—को क्रमशः 3 फरवरी 2024, 18 दिसंबर 2024 और 6 नवंबर 2025 को सेवा में शामिल किया जा चुका है।
‘संशोधक’ का डिजाइन और निर्माण भारतीय शिपिंग रजिस्टर के वर्गीकरण नियमों के अनुरूप किया गया है। यह पोत तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने, बंदरगाहों और नौवहन मार्गों का निर्धारण करने में सक्षम है। इसके अलावा यह रक्षा और नागरिक उपयोग के लिए समुद्र विज्ञान एवं भू-भौतिकीय आंकड़े एकत्र करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
करीब 3400 टन विस्थापन और 110 मीटर लंबाई वाले इस जहाज में अत्याधुनिक जलवैज्ञानिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें डेटा अधिग्रहण एवं प्रसंस्करण प्रणाली, स्वायत्त जलमार्ग वाहन, रिमोट संचालित वाहन, डीजीपीएस आधारित पोजिशनिंग सिस्टम और डिजिटल साइड स्कैन सोनार शामिल हैं। दो डीजल इंजनों से संचालित यह पोत 18 समुद्री मील से अधिक की गति हासिल करने में सक्षम है।
इस अत्याधुनिक पोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना की सर्वेक्षण क्षमता और समुद्री सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
