नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद को लेकर एक सख्त राजनीतिक बयान में इसे वामपंथी विचारधारा की उपज बताते हुए कहा गया कि देश में नक्सलवाद के फैलने का कारण गरीबी नहीं, बल्कि यही विचारधारा रही है। वक्ता ने दावा किया कि नक्सलवाद के कारण ही कई क्षेत्रों में विकास बाधित हुआ और गरीबी बढ़ी।
बयान में कहा गया कि कम्युनिस्ट विचारधारा का उद्देश्य अन्याय का विरोध करना नहीं, बल्कि भारत की संसदीय व्यवस्था का विरोध करना रहा है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि वामपंथी उग्रवादियों ने दशकों तक उन इलाकों में विकास नहीं होने दिया, जहां वे सक्रिय रहे।
नक्सल हिंसा पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा गया कि अब ऐसे तत्वों के दिन समाप्त हो चुके हैं और जो भी हथियार उठाएगा, उसे कानून के दायरे में जवाब देना पड़ेगा। वक्ता ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से देश तेजी से नक्सल-मुक्ति की ओर बढ़ रहा है।
सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा गया कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नक्सल-मुक्त भारत की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। इस सफलता का श्रेय केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, विशेष रूप से कोबरा और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, राज्य पुलिस, छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी जवानों और स्थानीय आदिवासियों को दिया गया।
बयान में यह भी कहा गया कि जिन क्षेत्रों में कभी “लाल आतंक” का प्रभाव था, जैसे बस्तर, वहां अब तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं और लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। वक्ता ने आरोप लगाया कि नक्सलियों ने गांवों में स्कूल, अस्पताल और बैंक जैसी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया और बाद में विकास न होने का आरोप सरकार पर लगाया।
इसके साथ ही कुछ बुद्धिजीवियों पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि वे नक्सलियों के मानवाधिकार की बात करते हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों और शहीदों के परिजनों की पीड़ा पर ध्यान नहीं देते।
वामपंथी विचारधारा की आलोचना करते हुए यह भी कहा गया कि यह विचारधारा अब अपना आधार खो चुकी है और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नए-नए तर्क प्रस्तुत कर रही है। वक्ता ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य सुशासन, सुरक्षा और विकास को मजबूत करना है तथा देश में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना है।
