पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश पर इसके प्रभाव को कम से कम रखने के लिए हाल के दिनों में कई बड़े और त्वरित फैसले लिए हैं। यही वजह है कि भारत की स्थिति कई अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिसका असर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और समुद्री मार्गों पर पड़ सकता है। हालांकि, भारत के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। ईरान ने भारतीय जहाजों समेत पांच अन्य देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने की घोषणा की है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके बावजूद केंद्र सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और सक्रिय बनी हुई है। सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने, कूटनीतिक स्तर पर संवाद बढ़ाने, वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश और घरेलू बाजार को स्थिर रखने जैसे अहम कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इन ताबड़तोड़ फैसलों का असर अब दिखने लगा है और भारत ने समय रहते रणनीतिक तैयारी कर ली है। यही कारण है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद देश की आर्थिक और व्यापारिक स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
