गांधीनगर। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच जहां दुनिया वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर मंथन कर रही है, वहीं गुजरात का बनास BIO-CNG मॉडल वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विजन के तहत विकसित यह मॉडल आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा की दिशा में एक सफल पहल के रूप में उभर रहा है।
गुजरात सरकार द्वारा विकसित यह मॉडल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में तेजी से आगे बढ़ा है। बनास डेयरी के सहयोग से तैयार यह BIO-CNG प्लांट गोबर जैसे पारंपरिक अपशिष्ट को स्वच्छ ईंधन और जैविक उर्वरक में बदलने का काम कर रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
इस परियोजना की सफलता को देखते हुए Ministry of Jal Shakti और Ministry of Cooperation के संयुक्त प्रयासों से देश के लगभग 15 राज्य इसे अपने यहां लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल न केवल ऊर्जा संकट से निपटने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गोबर से गैस और खाद बनाने की यह प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ सतत विकास को भी बढ़ावा दे रही है।
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की बढ़ती आवश्यकता के बीच गुजरात का यह मॉडल देश के लिए एक नई दिशा और प्रेरणा बनकर सामने आया है।
