उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी आकार ले रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों को न केवल स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, बल्कि वे स्थानीय स्तर पर मजबूत ब्रांड स्थापित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश कर रहे हैं। इसी क्रम में “ पंचनद आचार ” स्वयं सहायता समूह ने गुणवत्ता, पारंपरिक स्वाद और प्रोफेशनल ब्रांडिंग के माध्यम से विशेष पहचान बनाई है।

“पंचनद” नाम इटावा क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है, जहाँ पाँच नदियों का संगम समृद्धि, एकता और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना को आधार बनाकर समूह की महिलाओं ने अपने उत्पाद को एक सशक्त स्थानीय ब्रांड के रूप में विकसित किया है। पंचनद आचार पारंपरिक स्वाद, स्थानीय संसाधनों और महिलाओं की मेहनत का उत्कृष्ट संगम है, जो क्षेत्रीय पहचान को व्यापक बाजार तक ले जाने की क्षमता रखता है।
समूह द्वारा निर्मित आम का अचार पारंपरिक विधि से शुद्ध सरसों के तेल और चयनित मसालों के साथ तैयार किया जाता है। उत्पादन प्रक्रिया में स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आधुनिक लेबलिंग और प्रोफेशनल प्रस्तुति के कारण यह उत्पाद स्थानीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
समूह की महिलाएं कच्चा माल स्थानीय किसानों से खरीदती हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
श्री कृष्ण भगवान स्वयं सहायता समूह, बेरीखेड़ा, महेवा, इटावा से श्रीमती पदमा कुशवाहा द्वारा तैयार “पंचनद आचार” का औपचारिक अनावरण मुख्य विकास अधिकारी श्री अजय कुमार गौतम के कर कमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त स्वतः रोजगार श्री विनय कुमार एवं जिला मिशन प्रबंधक श्री सूर्य नारायण पाण्डेय भी उपस्थित रहे।
मुख्य विकास अधिकारी श्री अजय कुमार गौतम ने कहा कि “NRLM के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की जा रही है। ‘पंचनद आचार’ जैसी पहल अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत है।”
उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण, विपणन सहायता और आवश्यक संसाधन निरंतर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि स्वयं सहायता समूह राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
इटावा की यह पहल दर्शाती है कि जब संगम की भावना और सामूहिक प्रयास जुड़ते हैं, तो समृद्धि की नई राहें स्वयं बन जाती हैं।
