2026 तक इटावा को बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य, सीडीओ की अध्यक्षता में कार्ययोजना पर मंथन
इटावा, 11 फरवरी 2026। जनपद इटावा को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से तैयार कार्ययोजना एवं बाल श्रम उन्मूलन व पुनर्वासन से जुड़े विभिन्न स्टेक होल्डर्स की कार्यशाला का आयोजन विकास भवन स्थित ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम ने की।

बैठक की शुरुआत में मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि बच्चों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बाल श्रम से मुक्त कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे नासमझ होते हैं और उन्हें यह समझ नहीं होता कि वे किस प्रकार के कार्य में लगे हैं, इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने परिवार और आसपास के क्षेत्र से बाल श्रम समाप्त करने की पहल करे।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों के अनुरूप जनपद को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष तक के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोर-किशोरियों से श्रम कराया जा सकता है, लेकिन उन्हें किसी भी खतरनाक व्यवसाय में कार्य नहीं कराया जा सकता।
सीडीओ ने बताया कि किशोरों से कार्य कराने की अधिकतम सीमा 6 घंटे निर्धारित है तथा 1 घंटे का विश्राम अनिवार्य है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद और प्रातः 8 बजे से पहले उनसे कोई कार्य नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि उम्र की पुष्टि के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं होगा, बल्कि विद्यालय की टीसी एवं नगर निगम द्वारा जारी प्रमाणपत्र ही मान्य होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि 14 वर्ष तक के बच्चों को श्रम से मुक्त कराए जाने के बाद विद्यालयों में उनका प्रवेश सुनिश्चित कराया जाएगा। वहीं 14 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए जनपद में तकनीकी कोर्स शुरू किए जाने पर बल दिया गया, ताकि वे कौशल विकास के माध्यम से सही दिशा में आगे बढ़ सकें और गलत रास्ते पर न भटकें।
कार्यशाला में नगर पालिका परिषद जसवंतनगर के श्याम बचन सरोज, सहायक श्रमायुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं अन्य स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।
