राजीव यादव आत्महत्या मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। नगर पालिका इटावा की चेयरमैन ज्योति गुप्ता और अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्रा की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश से दोनों को बड़ी राहत मिली है।
कई लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही पूर्व चेयरमैन कुलदीप उर्फ़ संटू गुप्ता को भी राहत मिल सकती है। संटू गुप्ता का पहले से ही कहना रहा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक द्वेष भावना से प्रेरित है और उन्हें तथा उनकी पत्नी को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने पहले ही प्रशासन और पुलिस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में राजनीति भी गहराई तक घुस चुकी है। राजीव यादव की मौत के बाद जहां जनता शुरू में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी दिखी, वहीं धीरे-धीरे राजनीतिक दखल ने हालात को बदल दिया। अब जनता का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि राजनीति दखल की वजह से पीड़ित परिवार का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कई लोगों का कहना है कि कौन किसका साथ दे रहा है ये अनुमान लगाना बहुत कठिन है। राजनीति ने न केवल दोहरा खेल खेला, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए न्याय की राह भी कठिन बना दी।
अब जबकि कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाई है और जांच जारी है, लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में न्याय किस ओर झुकेगा। नगर पालिका का कामकाज फिर से पटरी पर आने की उम्मीद है, लेकिन जनता के मन में सवाल अब भी वही है क्या इस घटना की असली सच्चाई कभी सामने आ पाएगी?
