तारीखी कब्रिस्तान बाइस ख्वाजा पर ग़ैर-क़ानूनी कब्ज़ा, आने वाली नस्लें कहाँ होंगी दफ़न

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इटावा का तारीखी और सबसे बड़ा बाइस ख्वाजा कब्रिस्तान इस वक़्त संगीन हालात से गुज़र रहा है। मुतवल्ली शाहिद अंसारी पर इल्ज़ाम है कि वो पैसों के लेन-देन के ज़रिए कब्रिस्तान की ज़मीन को अवैध तौर पर बेच रहे हैं। यह मामला मुस्लिम क़ौम में गहरी बेचैनी और ग़ुस्से का सबब बन गया है, क्योंकि कब्रिस्तान की ज़मीन पहले से ही सिमित है और उसके सिमटने से आने वाली नस्लों के लिए दफ़्नाने की जगह का संकट पैदा हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक़ शाहिद अंसारी अब तक तक़रीबन 80 लाख रुपये गरीब मुसलमानों से प्लॉट देने के नाम पर वसूल चुके हैं। यह रकम ज़मीन की कथित खरीद-फरोख़्त और अवैध सौदों से जुड़ी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर इस सिलसिले को रोका नहीं गया तो बाइस ख्वाजा का असल वजूद ही ख़त्म हो जाएगा।

लोगों का दावा है कि मामला सिर्फ़ बाइस ख्वाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इटावा के तक़रीबन हर कब्रिस्तान का यही हाल है। ज़्यादातर कब्रिस्तानों की ज़मीन पर अवैध तामीरात और कब्ज़े बढ़ते जा रहे हैं। कई जगह तो कब्रिस्तानों की सरहद तक मिटा दी गई है और वहाँ दुकानों, मकानों और दीगर तामीरात का काम खुलकर हो रहा है।

मुस्लिम समाज के बुज़ुर्गों का कहना है कि यह सिर्फ़ ज़मीन का मसला नहीं बल्कि हमारी मज़हबी और तारीखी विरासत का मामला है। अगर आज क़ौम एकजुट होकर आवाज़ नहीं उठाएगी तो आने वाले वक़्त में इन कब्रिस्तानों से अवैध कब्ज़ा हटाना नामुमकिन हो जाएगा। उनका कहना है कि यह मामला अदालत और प्रशासन दोनों के सामने उठाया जाना चाहिए ताकि क़ौम की अमानत को बचाया जा सके।

फ़िलहाल, प्रसाशन की तरफ़ से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। लेकिन शहर में उठ रही आवाज़ें बताती हैं कि अब मुस्लिम समाज का सब्र टूट रहा है। लोग अब साफ़ कह रहे हैं कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली नस्लें हमें माफ़ नहीं करेंगी और इटावा के तारीखी कब्रिस्तान सिर्फ़ नाम तक रह जाएंगे।

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