अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर इटावा सफारी पार्क में नगर क्षेत्र स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को विशेष रूप से आमंत्रित कर पार्क का भ्रमण कराया गया। इसके पश्चात मनन सभागार में एक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें बाघों के संरक्षण और महत्व पर विस्तृत चर्चा हुई।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए सफारी पार्क के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि वर्तमान में पूरे भारत में 58 टाइगर रिजर्व घोषित किए जा चुके हैं, जिनमें कुल मिलाकर 3600 से अधिक बाघों की संख्या दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में दुधवा, पीलीभीत एवं रानीपुर टाइगर रिजर्व सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व के बफर जोन के रूप में बिजनौर जनपद में अमानगढ़ टाइगर रिजर्व स्थित है।
डॉ. पटेल ने कहा कि प्रकृति के संतुलन और जैव विविधता की रक्षा के लिए बाघों का संरक्षण बेहद आवश्यक है। यदि हम इन्हें नहीं बचा पाए, तो आने वाली पीढ़ियां बाघों को केवल किताबों और तस्वीरों में ही देख सकेंगी। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे भी पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प लें।
कार्यक्रम में सफारी पार्क के उप निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह और जीवविज्ञानी बी.एन. सिंह ने भी अपने विचार साझा करते हुए बाघों के प्राकृतिक आवास, व्यवहार और संकटों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सफारी पार्क के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को बाघों की जैविक महत्ता और उनके संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना था, जिसे सभी ने गहराई से समझा और सराहा।
