मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) ने बिजली के निजीकरण, स्मार्ट और प्रीपेड मीटर लगाने, घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने के वादे को पूरा करने और दिन-रात के अलग-अलग बिजली बिल बनाने के आदेश के विरोध में कचहरी पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें अपनी मांगों को मजबूती से रखा गया। यह प्रदर्शन बिजली विभाग में बढ़ते भ्रष्टाचार और जनता के शोषण के खिलाफ एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पार्टी के जिला मंत्री नाथूराम यादव ने कहा कि राज्य सरकार पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण कर जनता के सामने गहरा संकट खड़ा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट और प्रीपेड मीटर लगाकर सरकार जनता की लूट के दरवाजे खोल रही है।नाथूराम यादव ने केंद्र सरकार के बिजली बिल 2022 को तत्काल वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने बिजली विभाग में रिक्त पदों को भरने, कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने, स्थायी नियुक्ति करने और संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग भी उठाई।

सचिव मंडल के सदस्य कामरेड संतोष शाक्य ने गरीब उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने और बिजली बिलों में हेराफेरी जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग बड़े बकायेदारों से डरता है और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता, जबकि गरीबों के कनेक्शन तुरंत काट दिए जाते हैं। इसके अलावा, उन्होंने खडकौली में चकरोड, लिंक रोड और नाली पर से अवैध कब्जा हटवाने की मांग भी की। उनके भाषण में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी झलक रही थी।
इस प्रदर्शन की सभा की अध्यक्षता डॉ. शौकीन सिंह ने की, जबकि संचालन का जिम्मा कॉमरेड अनिल दीक्षित ने संभाला। प्रदर्शन में मुख्य रूप से प्रेमशंकर यादव, किसान सभा के जिला अध्यक्ष रामबृजेश, संतोष राजपूत, इंद्रपाल, शिवराम सिंह, रामवरन सिंह, रामनरेश, नरेंद्र शाक्य, ओपी सिंह, पंचम सिंह, आपेंद्र यादव और नौजवान सभा के मोनू यादव, संतोष कुमार जैसे कार्यकर्ता शामिल रहे। यह प्रदर्शन सरकार के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक बना और जनता की आवाज को बुलंद करने में सफल रहा।
